
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांचीः- लंबे इंतजार और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उठे संवैधानिक सवालों के बाद आखिरकार झारखंड राज्य सूचना आयोग को नए सूचना आयुक्त मिल गए। बुधवार को राजभवन में आयोजित गरिमामय समारोह में राज्यपाल संतोष गंगवार ने शिवपूजन पाठक, अनुज सिन्हा, अमूल्य नीरज खलको और तनूज खत्री को राजभवन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में शपथ दिलवाईको पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन , मंत्रीगण, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इन नियुक्तियों की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि राज्यपाल संतोष गंगवार ने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव पर पहले दो बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। राजभवन की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया के कुछ पहलुओं और कानूनी औपचारिकताओं पर सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद राज्य सरकार को प्रस्ताव में आवश्यक स्पष्टीकरण और प्रक्रियागत सुधार करने पड़े। सभी संवैधानिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अंततः राज्यपाल ने नियुक्तियों को स्वीकृति दी और बुधवार को चारों सूचना आयुक्तों को शपथ दिलाई।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इन नियुक्तियों पर काफी समय से चर्चा चल रही थी। सूचना आयोग में लंबे समय से रिक्तियां होने के कारण सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत दायर द्वितीय अपीलों और शिकायतों का निष्पादन प्रभावित हो रहा था। बड़ी संख्या में मामले लंबित होने से आम नागरिकों को सूचना प्राप्त करने में विलंब का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राज्यपाल ने सभी नवनियुक्त सूचना आयुक्तों से संविधान और सूचना का अधिकार अधिनियम की भावना के अनुरूप निष्पक्षता, पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपेक्षा जताई। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चारों सूचना आयुक्तों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके कार्यभार संभालने से आयोग की कार्यप्रणाली और अधिक प्रभावी होगी तथा लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा। राज्य सूचना आयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है। यह सरकारी विभागों द्वारा सूचना उपलब्ध नहीं कराने या निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं देने से संबंधित मामलों की सुनवाई करता है। आयोग की सक्रियता से सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ती है और नागरिकों के सूचना के अधिकार को मजबूती मिलती है। राज्यपाल द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया पर दो बार आपत्ति जताया जाना इस बात का संकेत है कि संवैधानिक पदों पर नियुक्ति में प्रक्रियागत शुचिता और कानूनी मानकों का पालन सर्वाेच्च प्राथमिकता है। अब जबकि सभी विवादों और औपचारिकताओं के बाद चारों सूचना आयुक्तों ने पदभार ग्रहण कर लिया है, राज्य में आरटीआई से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण और आयोग की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद की जा रही है।
