
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची। झारखंड अधिविद्य परिषद ने प्रमाण-पत्रों में संशोधन की प्रक्रिया को लेकर जारी नई अधिसूचना में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए वह प्रावधान शामिल किया है, जिसकी मांग राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने छात्रहित में अपने पत्र के माध्यम से उठाई थी। इससे बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को राहत मिलने की उम्मीद है। राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने झारखंड अधिविध परिषद अध्यक्ष को भेजे अपने पत्र में तीन प्रमुख सुझाव दिए थे। दूसरी मांग मैट्रिक संशोधन आवेदन लंबित रहने की स्थिति में इंटरमीडिएट संशोधन हेतु आवेदन सशर्त स्वीकार करने संबंधी स्पष्ट दिशा निर्देश परिषद द्वारा निर्गत किए जाएं। इनमें तीसरी मांग यह थी कि आवश्यकता होने पर विज्ञप्ति संख्या 48/2025 में उपयुक्त संशोधन अथवा स्पष्टीकरण जारी कर इस व्यावहारिक कठिनाई का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए।
परिषद द्वारा नई विज्ञप्ति संख्या 44/2026 में इसी मांग के अनुरूप संशोधन करते हुए स्पष्ट किया गया कि प्रमाण-पत्रों में संशोधन हेतु आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को अब न्यायिक दंडाधिकारी से सत्यापित शपथ-पत्र प्रस्तुत करना होगा तथा संशोधन की प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देशों में भी परिवर्तन किया गया है। इससे पूर्व जारी व्यवस्था में उत्पन्न व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास किया गया है। साथ ही झारखंड अधिविद्य परिषद ने प्रमाण-पत्रों में संशोधन की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए आवेदन की अंतिम तिथि 30 जून 2026 से बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दी है। इसके साथ ही परिषद ने संशोधन प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश एवं प्रावधानों में भी बदलाव किया है। जिन विद्यार्थियों ने मैट्रिक प्रमाण पत्र में संशोधन हेतु आवेदन जमा कर दिया है, चालान रसीद के आधार पर इंटरमीडिएट प्रमाण पत्रों में संशोधन हेतु आवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति से संबंधित निर्देश परिषद अध्यक्ष ने झारखंड अधिविध परिषद के सचिव को दिया है। यह निर्णय बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को राहत प्रदान करेगा।
गौरतलब है कि राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने अपने पत्र में कहा था कि वर्तमान व्यवस्था के कारण अनेक विद्यार्थी संशोधन की प्रक्रिया से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने परिषद से आग्रह किया था कि छात्रहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए व्यावहारिक कठिनाइयों का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि कोई भी पात्र छात्र केवल प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण अपने प्रमाण-पत्रों में संशोधन के अवसर से वंचित न रहे। परिषद की ओर से जारी संशोधित व्यवस्था को छात्रहित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसे राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा की सक्रिय पहल और छात्र समस्याओं के प्रति उनकी संवेदनशीलता का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है।
