
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए दो अत्यंत जटिल कैंसर सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की हैं। इन सफल ऑपरेशनों ने न केवल रिम्स की उन्नत सर्जिकल क्षमता को प्रमाणित किया है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि अब झारखंड में ही जटिल कैंसर रोगों का उच्चस्तरीय उपचार उपलब्ध हो रहा है। दोनों सर्जरी का नेतृत्व सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अजीत कुशवाहा एवं डॉ. रोहित झा ने किया। ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया विभाग की ओर से डॉ. दीपाली ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सर्जिकल टीम में डॉ. अभिषेक, डॉ. शास्वत, डॉ. हितेश, डॉ. ईशांत, डॉ. बाला तथा डॉ. सहर शामिल रहे। विशेषज्ञों के समन्वित प्रयास और आधुनिक सर्जिकल तकनीकों के कारण दोनों मरीजों का सफल उपचार संभव हो सका। पहला मामला पश्चिम बंगाल के पुरुलिया की 46 वर्षीय महिला का था, जो लंबे समय से पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द और लिवर के बढ़ने की समस्या से पीड़ित थीं। विस्तृत चिकित्सीय जांच, सीटी स्कैन एवं अन्य परीक्षणों में उनके लिवर के बाएं भाग में विशाल ’’हेपैटोसेल्युलर कार्सिनोमा पाया गया। यह लिवर का सबसे सामान्य प्राथमिक कैंसर माना जाता है, जो समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकता है। रोग की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने ’’लेफ्ट हेपेटिक लोबेक्टॉमी’’ (लिवर के बाएं हिस्से को शल्यक्रिया द्वारा निकालना) करने का निर्णय लिया। अत्यंत सावधानी के साथ ऑपरेशन कर कैंसरग्रस्त भाग को पूरी तरह निकाल दिया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर रही और अब वह संतोषजनक रूप से स्वस्थ होकर रिकवरी कर रही हैं। दूसरा मामला हजारीबाग की 40 वर्षीय महिला का था, जिन्हें लगातार खांसी, खांसी के साथ रक्तस्राव (हेमोप्टाइसिस), बार-बार बुखार, सांस लेने में तकलीफ तथा तेजी से वजन घटने जैसी गंभीर समस्याएं थीं। ब्रोंकोस्कोपी एवं इमेजिंग जांच में उनके बाएं मुख्य श्वासनली (लेफ्ट मेन ब्रोंकस) में दुर्लभ ’’पल्मोनरी कार्सिनॉयड ट्यूमर’’ की पुष्टि हुई। इस ट्यूमर के कारण फेफड़े का ऊपरी भाग लगभग पूरी तरह अवरुद्ध हो चुका था, जिससे संक्रमण और श्वसन संबंधी जटिलताओं का खतरा लगातार बढ़ रहा था। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने ’’लेफ्ट अपर लोबेक्टॉमी’’ के माध्यम से फेफड़े के प्रभावित हिस्से और ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और उनकी रिकवरी चिकित्सकों की निगरानी में संतोषजनक ढंग से जारी है।
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के अनुसार रिम्स में अब कैंसर उपचार केवल सामान्य सर्जरी तक सीमित नहीं रह गया है। यहां सिर एवं गर्दन, फेफड़े एवं वक्ष (थोरेसिक), लिवर एवं पित्त नली (हेपेटोबिलियरी), गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, स्त्री रोग, स्तन तथा यूरो-ऑन्कोलॉजी से जुड़े जटिल कैंसरों की नियमित और आधुनिक मानकों के अनुरूप सर्जरी की जा रही है। विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में 180 सिर एवं गर्दन के कैंसर, 87 गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर, 33 हेपेटोबिलियरी कैंसर, 102 स्त्री रोग संबंधी कैंसर, 66 स्तन कैंसर तथा 27 यूरो-ऑन्कोलॉजिकल कैंसर की सफल सर्जरी की जा चुकी है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि रिम्स में कैंसर सर्जरी की विशेषज्ञता लगातार मजबूत हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के उपचार में समय पर पहचान, सटीक जांच, बहुविषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) उपचार पद्धति और अनुभवी सर्जिकल टीम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। रिम्स में आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित विशेषज्ञों और समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों के संयुक्त प्रयास से अब जटिल कैंसर रोगियों को राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता कम हो रही है। विभाग का मानना है कि इसी प्रकार की उपलब्धियों के बल पर रिम्स पूर्वी भारत में कैंसर उपचार एवं ऑन्को-सर्जरी के एक प्रमुख रेफरल केंद्र के रूप में तेजी से अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।
