
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: सरला बिरला विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के नए विद्यार्थियों के लिए “एआई युग के लिए अपनी सोच और सीखने की क्षमता का विकास” विषय पर एक्सपर्ट टॉक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी, आईएएस ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बदलती तकनीकी दुनिया के अनुरूप स्वयं को तैयार करने और सीखने की क्षमता को निरंतर विकसित करने का आह्वान किया। श्री कुलकर्णी ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक तेजी से बदल रही है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई ने शिक्षा, रोजगार और कार्य करने के तरीकों को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। ऐसे दौर में विद्यार्थियों के लिए केवल निर्धारित पाठ्यक्रम तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। उन्हें अपने विषय के साथ-साथ नवीन तकनीकों, कौशल और व्यावहारिक ज्ञान को भी लगातार सीखना होगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को लक्ष्य पर बाज जैसी नजर रखते हुए अपनी क्षमताओं का निरंतर विकास करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीक को अवसर के रूप में अपनाने की सलाह दी। कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या प्रमाण-पत्र प्राप्त करना नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझना और उनका प्रभावी समाधान तलाशना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल शैक्षणिक प्रमाण-पत्र दीर्घकालिक करियर सुरक्षा की गारंटी नहीं देते। इसके लिए ज्ञान के साथ कौशल, व्यवहारिक समझ और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने की क्षमता जरूरी है। एआई के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए श्री कुलकर्णी ने कहा कि आने वाले समय में नौकरियों की प्रकृति में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे। एआई को सीखने और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए सहायक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन विद्यार्थियों को अपनी सोच और निर्णय क्षमता पूरी तरह एआई पर निर्भर नहीं करनी चाहिए। उन्होंने तथ्यों का सत्यापन करने, प्रश्न पूछने और प्राप्त जानकारी का तार्किक विश्लेषण करने की आदत विकसित करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय गुणों का महत्व भी लगातार बना रहेगा। एथिकल जजमेंट, क्रिएटिविटी, क्रिटिकल थिंकिंग और कॉमन सेंस जैसी क्षमताएं विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार करेंगी। उन्होंने एकाग्रता, ध्यान, अनुशासन और निरंतरता को सफलता की महत्वपूर्ण कुंजी बताते हुए विद्यार्थियों को सीखने की प्रक्रिया को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी। एक्सपर्ट टॉक के दौरान श्री कुलकर्णी ने अपने प्रशासनिक अनुभवों और विचारों को विद्यार्थियों के साथ साझा किया। उन्होंने विद्यार्थियों के सवालों का जवाब देते हुए उन्हें अपने करियर को लेकर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने तथा उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों ने एआई, करियर, कौशल विकास और भविष्य की चुनौतियों से जुड़े प्रश्न पूछे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक, कुलपति प्रो. सी. जगनाथन, कुलसचिव प्रो. एस. बी. दंडीन सहित शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
एक्सपर्ट टॉक के आयोजन पर विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान एवं राज्यसभा सांसद सह निदेशक, प्लानिंग एंड डेवलपमेंट डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे संवाद विद्यार्थियों को कक्षा की पढ़ाई से आगे बढ़कर बदलते समय की आवश्यकताओं को समझने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने का अवसर प्रदान करते हैं।
