
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: झारखंड में नगर निकाय चुनाव को लेकर हेमंत सोरेन सरकार के फैसले पर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 2024 की विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची के आधार पर निकाय चुनाव कराने के निर्णय को “लोकतंत्र के साथ खुला धोखा” करार देते हुए सरकार पर सीधा हमला बोला है। मरांडी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने तुरंत अपना फैसला वापस नहीं लिया तो भाजपा पूरे राज्य में उग्र आंदोलन छेड़ेगी।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि नगर निकाय चुनाव स्थानीय स्वशासन की बुनियाद होते हैं, लेकिन हेमंत सरकार इन्हें सत्ता बचाने का हथकंडा बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 की वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ियां हैं, जिनकी जानकारी सरकार को भली-भांति है। इसके बावजूद उसी सूची पर निकाय चुनाव कराना इस बात का प्रमाण है कि सरकार निष्पक्ष चुनाव नहीं, बल्कि चुनावी प्रबंधन करना चाहती है।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम सूची में दर्ज हैं जो वहां के स्थायी निवासी नहीं हैं, जबकि कई स्थानीय नागरिकों को जानबूझकर सूची से बाहर रखा गया है। उन्होंने इसे “वोट बैंक को साधने की साजिश” बताते हुए कहा कि हेमंत सरकार प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर कर रही है। नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि जब परिसीमन, आरक्षण और मतदाता सूची जैसे मूलभूत मुद्दे अभी तक कानूनी और संवैधानिक रूप से सुलझे ही नहीं हैं, तो सरकार किस जल्दबाजी में चुनाव कराना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह जल्दबाजी केवल इस बात का संकेत है कि सरकार जनता का सामना करने से डर रही है।
बाबूलाल मरांडी ने दो टूक कहा कि भाजपा इस “धांधलीपूर्ण व्यवस्था” को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने अद्यतन मतदाता सूची के साथ पारदर्शी तरीके से चुनाव कराने की घोषणा नहीं की, तो भाजपा सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी। जरूरत पड़ी तो राज्यभर में आंदोलन, घेराव और जनआक्रोश अभियान भी चलाया जाएगा। उन्होंने चुनाव आयोग से भी कड़ा रुख अपनाने की मांग करते हुए कहा कि यदि आयोग ने इस मामले में चुप्पी साधी, तो जनता का भरोसा संवैधानिक संस्थाओं से उठ जाएगा। मरांडी ने कहा कि नगर निकाय चुनाव जनता के अधिकार हैं, न कि सरकार की राजनीतिक प्रयोगशाला। दूसरी ओर, हेमंत सरकार और सत्तारूढ़ झामुमो की ओर से इस गंभीर आरोप पर अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निकाय चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर शुरू हुआ यह टकराव आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को और गर्माने वाला है। अब सवाल यही है कि हेमंत सरकार विपक्ष की चेतावनियों को नजरअंदाज कर अपने फैसले पर कायम रहती है या फिर बढ़ते दबाव के आगे झुककर मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया पर पुनर्विचार करती है। झारखंड की जनता इसकी साक्षी बनने को तैयार है।
