
मुखर संवाद के लिए शिल्पी यादव की रिपोर्ट
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रांची : झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद धीरज साहू ने राज्यसभा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया है। उनके इस फैसले के बाद महागठबंधन के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
धीरज साहू लंबे समय से कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में गिने जाते रहे हैं और राज्यसभा के लिए उनका नाम संभावित उम्मीदवारों में शामिल माना जा रहा था। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस बार राज्यसभा का चुनाव नहीं लड़ना चाहते। उनके इस निर्णय के बाद कांग्रेस को नए चेहरे की तलाश करनी पड़ सकती है।
वर्तमान विधानसभा की संख्या बल पर नजर डालें तो सत्तारूढ़ महागठबंधन की स्थिति मजबूत दिखाई देती है। झारखंड विधानसभा में (झामुमो) के 34 विधायक हैं, जबकि (कांग्रेस) के पास 16 विधायक हैं। वहीं (राजद) के 4 विधायक हैं। इस प्रकार महागठबंधन के कुल विधायकों की संख्या 54 होती है, जो राज्यसभा की एक सीट पर उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संख्या बल के आधार पर महागठबंधन का उम्मीदवार आसानी से चुनाव जीत सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्यसभा के लिए उम्मीदवार कांग्रेस का होगा या झामुमो अपना प्रत्याशी मैदान में उतारेगा। कांग्रेस का तर्क है कि गठबंधन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है और पार्टी को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। दूसरी ओर झामुमो भी अपने राजनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए एक सीट पर कांग्रेस का दावा स्वीकार कर चुकी है।
धीरज साहू के चुनाव लड़ने से पीछे हटने के बाद कांग्रेस के भीतर कई अन्य नामों पर चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी नेतृत्व केंद्रीय स्तर पर विचार-विमर्श कर संभावित उम्मीदवार का चयन कर सकता है। वहीं झामुमो भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और गठबंधन धर्म को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लेने की तैयारी में है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि राज्यसभा चुनाव के माध्यम से महागठबंधन आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एकता और समन्वय का संदेश देना चाहता है। इसलिए उम्मीदवार चयन में सभी सहयोगी दलों की सहमति को महत्व दिया जा सकता है।
फिलहाल धीरज साहू के चुनाव नहीं लड़ने के फैसले ने राज्यसभा चुनाव की तस्वीर को नया मोड़ दे दिया है। अब सबकी निगाहें कांग्रेस और झामुमो नेतृत्व पर टिकी हैं कि वे किस नाम पर सहमति बनाते हैं। आने वाले दिनों में उम्मीदवार की घोषणा के साथ राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
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