राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रत्याशी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पसंद का होगा, प्रत्याशी के नाम पर अंतिम मुहर लगायेंगें हेमंत सोरेन कांग्रेस को झामुमो के विधायकों के धोखे का डर

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मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांचीः- झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। महागठबंधन के भीतर कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बीच उम्मीदवार चयन को लेकर लगातार मंथन चल रहा है। कांग्रेस भले ही अपने खाते की सीट पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन प्रत्याशी के चयन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सहमति और पसंद को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ही कांग्रेस प्रत्याशी के नाम पर अंतिम मुहर लगायेंगें। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व इस बार ऐसा उम्मीदवार मैदान में उतारना चाहता है जो न केवल महागठबंधन के सभी दलों को स्वीकार्य हो, बल्कि झामुमो के विधायकों के बीच भी मजबूत पकड़ रखता हो। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की आशंका को माना जा रहा है। कांग्रेस नेताओं को डर है कि यदि ऐसा उम्मीदवार चुना गया जो झामुमो नेतृत्व की पसंद का नहीं हुआ, तो चुनाव के दौरान अप्रत्याशित राजनीतिक परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

वहीं मुखर संवाद के प्रधान संपादक अशोक कुमार का मानना है कि झारखंड की राजनीति में झामुमो वर्तमान में महागठबंधन का सबसे बड़ा घटक दल है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भूमिका निर्णायक बनी हुई है। ऐसे में कांग्रेस कोई भी ऐसा जोखिम नहीं लेना चाहती जिससे सहयोगी दलों के बीच असहजता उत्पन्न हो। यही कारण है कि उम्मीदवार चयन को लेकर दिल्ली से लेकर रांची तक लगातार बैठकों का दौर जारी है। महागठबंधन के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद कांग्रेस पूरी तरह आश्वस्त दिखाई नहीं दे रही है। पिछले वर्षों में विभिन्न राज्यों के राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक समीकरणों में अचानक बदलाव के कई उदाहरण सामने आए हैं। झारखंड में भी विपक्ष लगातार सत्ता पक्ष के भीतर मतभेदों का दावा करता रहा है। ऐसे में कांग्रेस किसी भी प्रकार की चूक से बचना चाहती है। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला लेने से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से विस्तृत चर्चा करेगा। पार्टी का मानना है कि सर्वसम्मति से तय उम्मीदवार को लेकर चुनाव मैदान में उतरने से किसी भी तरह की असंतोष की संभावना कम होगी। यही वजह है कि संभावित नामों पर विचार करते समय राजनीतिक अनुभव, संगठनात्मक स्वीकार्यता और गठबंधन धर्म को प्रमुख आधार बनाया जा रहा है।वहीं विपक्षी दल भी राज्यसभा चुनाव पर नजर बनाए हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी लगातार यह दावा कर रही है कि महागठबंधन के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया ही यह साबित कर रही है कि सहयोगी दलों के बीच विश्वास का संकट मौजूद है। हालांकि कांग्रेस और झामुमो के नेता सार्वजनिक रूप से किसी भी तरह के मतभेद से इनकार कर रहे हैं।

राज्यसभा चुनाव केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से गठबंधन की एकजुटता और नेतृत्व क्षमता की भी परीक्षा होती है। यदि कांग्रेस और झामुमो मिलकर सर्वसम्मति से उम्मीदवार तय कर लेते हैं, तो यह महागठबंधन की मजबूती का संदेश होगा। दूसरी ओर उम्मीदवार चयन को लेकर लंबा खींचतान या असहमति विपक्ष को राजनीतिक हमला करने का अवसर दे सकती है। फिलहाल सभी की नजर कांग्रेस नेतृत्व और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बीच होने वाली आगामी चर्चाओं पर टिकी है। माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार के नाम की घोषणा होते ही झारखंड की राजनीति में चल रही अटकलों पर विराम लग जाएगा।

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