राज्यसभा चुनाव: निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी को झामुमो-कांग्रेस विधायकों का समर्थन का भाजपा का दावा, प्रदेश प्रवक्ता अजय साह के बयान से बारिश के बावजूद राजनीतिक तपिश बढ़ी

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Mukhar samvad के लिए शिल्पी यादव की रिपोर्ट
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रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के नामांकन को विद्या घोषित होने के बाद राज्य में राजनीतिक घटनाक्रमों में तेजी आई है l इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने दावा किया है कि निर्दलीय राज्यसभा प्रत्याशी परिमल नाथवाणी को झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के कई विधायकों का समर्थन प्राप्त है। भाजपा के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।
अजय साह ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव में सत्ता पक्ष के भीतर ही मतभेद सामने आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि झामुमो और कांग्रेस के कई विधायक परिमल नाथवाणी के पक्ष में मतदान करने के पक्षधर हैं। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि नाथवाणी लंबे समय से झारखंड के विकास और औद्योगिक निवेश से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं, जिसके कारण उन्हें विभिन्न दलों के नेताओं का समर्थन मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव केवल राजनीतिक दलों की ताकत का नहीं, बल्कि उम्मीदवार की स्वीकार्यता का भी चुनाव होता है। परिमल नाथवाणी की कार्यशैली और झारखंड के प्रति उनके योगदान को देखते हुए कई विधायक उन्हें समर्थन देने के इच्छुक हैं। भाजपा ने दावा किया कि चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

अजय साह ने राज्य सरकार और महागठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि गठबंधन के भीतर समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के कई फैसलों से सत्ता पक्ष के विधायक भी संतुष्ट नहीं हैं। यही कारण है कि राज्यसभा चुनाव में कुछ विधायक अपनी अंतरात्मा की आवाज पर मतदान कर सकते हैं।हालांकि झामुमो और कांग्रेस की ओर से भाजपा के इस दावे को खारिज किया गया है। महागठबंधन के नेताओं का कहना है कि उनके सभी विधायक एकजुट हैं और गठबंधन के अधिकृत उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे। उन्होंने भाजपा पर भ्रम फैलाने और राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में संख्या बल महत्वपूर्ण होता है, लेकिन कई बार राजनीतिक समीकरण और व्यक्तिगत संबंध भी परिणामों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में भाजपा के इस दावे ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है l इस बीच परिमल नाथवाणी को लेकर भाजपा द्वारा किए गए दावों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। अब सभी की नजरें मतदान और मतगणना पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि भाजपा का दावा कितना सही साबित होता है और राज्यसभा चुनाव में किस उम्मीदवार को कितना समर्थन मिलता है।

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