
रांची : झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को मंगलवार को बड़ी सफलता मिली। झारखंड पुलिस मुख्यालय, रांची में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा के समक्ष कुल 60 लाख रुपये के इनामी 16 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वालों में 11 पुरुष और पांच महिला नक्सली शामिल हैं। इनमें जोनल कमांडर, सब-जोनल कमांडर तथा अन्य सक्रिय उग्रवादी कैडर शामिल हैं, जो लंबे समय से विभिन्न नक्सली घटनाओं में संलिप्त रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में सबसे प्रमुख नाम 15 लाख रुपये के इनामी रीजनल कमांडर संतोष उर्फ बासुदेव दा उर्फ गांधी का है। पुलिस के अनुसार संतोष लंबे समय से प्रतिबंधित नक्सली संगठन का सक्रिय सदस्य था और संगठन की कई महत्वपूर्ण गतिविधियों का संचालन करता था। उसके खिलाफ राज्य के विभिन्न जिलों में अनेक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस मुख्यालय में आयोजित आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान सभी 16 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान में विश्वास जताया। उन्होंने भविष्य में सामान्य नागरिक की तरह जीवन व्यतीत करने तथा समाज के विकास में योगदान देने का संकल्प व्यक्त किया। आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी जमा कराए। इनमें इंसास राइफल, एके-47 सहित कुल 11 आधुनिक हथियार शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने 1,562 जीवित गोलियां भी पुलिस को सौंपीं। पुलिस अधिकारियों ने इसे सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इन हथियारों के संगठन के पास बने रहने से भविष्य में हिंसक घटनाओं की आशंका बनी रहती।
इस अवसर पर डीजीपी तदाशा मिश्रा ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों का स्वागत करते हुए कहा कि झारखंड पुलिस की प्राथमिकता राज्य में शांति, विकास और कानून का राज स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति पूरी तरह खुली है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को नियमानुसार आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर तथा समाज में सम्मानपूर्वक पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे लगातार अभियानों, विकास योजनाओं के विस्तार और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण बड़ी संख्या में नक्सली संगठन छोड़कर आत्मसमर्पण कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि उग्रवादी संगठनों का जनाधार लगातार कमजोर हो रहा है और उनका प्रभाव सीमित होता जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही स्थानीय लोगों का विश्वास जीतने और विकास योजनाओं को गांवों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया जा रहा है। इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है और कई सक्रिय नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। झारखंड पुलिस ने राज्य के शेष सक्रिय नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करें और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं। पुलिस का कहना है कि जो लोग मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि हिंसक गतिविधियों में शामिल रहने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। 16 नक्सलियों के एक साथ आत्मसमर्पण को झारखंड में नक्सलवाद के विरुद्ध चल रहे अभियान की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इससे नक्सली संगठनों की गतिविधियों पर और प्रभावी अंकुश लगेगा तथा राज्य के प्रभावित क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और विकास की प्रक्रिया को नई गति मिलेगी।
