
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
जमशेदपुर: पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका, मुसाबनी और घाटशिला क्षेत्र में ब्रेन मलेरिया के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया है। उन्होंने जमशेदपुर के सदर अस्पताल पहुंचकर ब्रेन मलेरिया से पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों से मुलाकात की तथा चिकित्सकों से उपचार की जानकारी ली। अर्जुन मुंडा ने अस्पताल में भर्ती बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के बाद कहा कि पूर्वी सिंहभूम के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से लगातार ब्रेन मलेरिया के मामले सामने आ रहे हैं, जो अत्यंत गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि बच्चों की जान बचाना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और स्वास्थ्य विभाग को इस दिशा में पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पोटका, मुसाबनी और घाटशिला जैसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। यदि समय पर जांच, उपचार और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को मलेरिया से बचाव के उपायों की जानकारी देना भी जरूरी है। पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार को आगाह करते हुए कहा कि ब्रेन मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में विशेष मेडिकल टीमों की तैनाती की जाए, पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएं। इसके साथ ही मच्छरों की रोकथाम के लिए व्यापक फॉगिंग, कीटनाशक छिड़काव और जलजमाव की समस्या का समाधान भी प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
अर्जुन मुंडा ने कहा कि अस्पतालों में बच्चों के इलाज के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध होने चाहिए। उन्होंने चिकित्सकों से भी आग्रह किया कि गंभीर मरीजों के उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही न हो और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने पीड़ित बच्चों के परिजनों से बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाया और भरोसा दिलाया कि इस गंभीर समस्या को लेकर वे सरकार का ध्यान लगातार आकृष्ट करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि बीमारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय होना आवश्यक है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बरसात के मौसम में मलेरिया का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को पहले से ही व्यापक तैयारी करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि ब्रेन मलेरिया प्रभावित इलाकों में विशेष अभियान चलाकर प्रत्येक गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं, संदिग्ध मरीजों की तत्काल जांच कराई जाए तथा गंभीर मरीजों को बिना विलंब बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कदम उठाएगी, ताकि किसी भी बच्चे की जान इलाज के अभाव में न जाए।
