
मुखर संवाद के लिए शिल्पी यादव की रिपोर्ट
रांची: तिरंगे की शान, राष्ट्रगान की गूंज, देशभक्ति के नारों और भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं के रंगों के बीच सरला बिरला विश्वविद्यालय, रांची में स्वतंत्रता दिवस समारोह उत्साह, उमंग और राष्ट्रप्रेम के वातावरण में मनाया गया। विश्वविद्यालय के खेल प्रांगण में आयोजित समारोह में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना देखते ही बनी। राष्ट्रीय ध्वज फहराने और सलामी के साथ समारोह का शुभारंभ हुआ। इसके बाद राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत की प्रस्तुति, शहीदों और राष्ट्रवीरों के सम्मान में जयघोष तथा विद्यार्थियों की अनुशासित परेड ने वातावरण को देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया। समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। तिरंगे के नीचे खड़े विद्यार्थियों के चेहरों पर देश के प्रति गर्व और सम्मान की भावना साफ दिखाई दे रही थी। स्वतंत्रता दिवस के इस आयोजन ने न केवल आजादी के संघर्ष और बलिदानों की याद दिलाई, बल्कि युवाओं को राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लेने का अवसर भी दिया।
स्वतंत्रता दिवस समारोह का सबसे आकर्षक पक्ष विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। विद्यार्थियों ने भारत के अलग-अलग राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य, योग और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जीवंत कर दिया। मंच पर देश के अलग-अलग हिस्सों की संस्कृति की झलक दिखाई दी तो ऐसा लगा मानो पूरा भारत एक ही परिसर में उतर आया हो। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में भारत की विविध भाषाओं, परंपराओं, रीति-रिवाजों और लोक-संस्कृतियों की खूबसूरत तस्वीर दिखाई दी। अलग-अलग संस्कृति और परंपराओं के बावजूद एकता के सूत्र में बंधे भारत की तस्वीर ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता में निहित है और यही विविधता देश को एक मजबूत राष्ट्र के रूप में पहचान देती है।
‘अनेकता में एकता’ की भावना को प्रस्तुतियों ने जिस जीवंतता के साथ सामने रखा, उसने स्वतंत्रता दिवस समारोह को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न रहने देकर राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा उत्सव बना दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच देशभक्ति गीतों की प्रस्तुतियों ने समारोह के उत्साह को और बढ़ा दिया। गायकों ने **“अपनी धरती, अपना अंबर, अपना हिंदुस्तान”** गीत प्रस्तुत कर मातृभूमि के प्रति प्रेम, सम्मान और गौरव की भावना व्यक्त की। गीत की प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर देशभक्ति के सुरों से गूंज उठा। विद्यार्थियों और अतिथियों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
देशभक्ति गीतों ने स्वतंत्रता संग्राम के उन वीरों की याद भी ताजा कर दी, जिनके त्याग, संघर्ष और बलिदान के कारण देश को आजादी मिली। कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों के बीच राष्ट्र के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कार्यक्रम को विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. श्रीधर डांडिन, कुलपति प्रो. सी. जगनाथन, महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक तथा राज्यसभा सांसद सह निदेशक, प्लानिंग एंड डेवलपमेंट, एसबीयू डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने संबोधित किया। अपने प्रेरणादायक संबोधनों में वक्ताओं ने विद्यार्थियों को देशभक्ति, जिम्मेदारी, युवा नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूक किया। मुख्य अतिथि डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने विशेष रूप से **वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने** के ऐतिहासिक अवसर का उल्लेख किया। उन्होंने वंदे मातरम् को राष्ट्रीय चेतना, राष्ट्रभक्ति और एकता की भावना से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को इसके संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी।
डॉ. वर्मा ने कहा कि देशभक्ति केवल भावनाओं और नारों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सच्ची देशभक्ति तब दिखाई देती है, जब नागरिक अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाते हुए राष्ट्र की प्रगति में योगदान देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से वंदे मातरम् की भावना को समझने और उसे अपने कार्यों, जिम्मेदारियों तथा राष्ट्र के प्रति समर्पण के माध्यम से आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने युवाओं से अपनी आकांक्षाओं और सपनों को देश की प्रगति से जोड़ने की अपील की। शिक्षा, नवाचार, प्रतिभा और जिम्मेदार नागरिकता को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि युवा शक्ति के सामर्थ्य से भारत को सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में नई गति मिल सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने व्यक्तिगत लक्ष्य के साथ राष्ट्रीय लक्ष्य को भी महत्व देने का संदेश दिया।
कुलसचिव प्रो. श्रीधर डांडिन ने विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के विचारों, चरित्र और कर्मों से निर्मित होगा। युवा जिस दिशा में अपनी ऊर्जा और प्रतिभा लगाएंगे, उसी दिशा में देश का भविष्य आगे बढ़ेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी क्षमताओं का उपयोग समाज और देश की प्रगति के लिए करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। युवाओं में अनुशासन, ईमानदारी, संवेदनशीलता और राष्ट्रहित की भावना मजबूत होगी तो भारत का भविष्य और अधिक उज्ज्वल होगा। कुलपति प्रो. सी. जगनाथन ने एकता, अनुशासन और जिम्मेदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी समझना चाहिए। जिम्मेदार नागरिक ही मजबूत लोकतंत्र और सशक्त राष्ट्र की नींव रख सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन और ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा दी। उनका कहना था कि देश के विकास में युवाओं की भूमिका केवल भविष्य तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्तमान में भी युवा अपनी प्रतिभा और सकारात्मक सोच से समाज में बदलाव ला सकते हैं।
महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक ने युवा शक्ति को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं में ऊर्जा, प्रतिभा और नवाचार की अपार क्षमता है। यदि इस शक्ति को सकारात्मक दिशा दी जाए तो राष्ट्र निर्माण के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने सपनों को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही कल के वैज्ञानिक, उद्यमी, शिक्षक, प्रशासक, शोधकर्ता और राष्ट्र निर्माता होंगे। इसलिए उन्हें अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग देशहित में करने की मानसिकता विकसित करनी चाहिए।
समारोह में वक्ताओं ने स्वतंत्रता दिवस को केवल ध्वजारोहण और सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए स्वतंत्रता के मूल्यों को जीवन में उतारने की जरूरत पर बल दिया। आजादी का अर्थ केवल बंधनों से मुक्ति नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों को समझना भी है। राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जहां देश की विविधता का परिचय कराया, वहीं वक्ताओं के संदेशों ने उस विविधता को एकता और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का काम किया। पूरा कार्यक्रम इसी भावना के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा कि भारत की ताकत उसकी विविध संस्कृति, युवा शक्ति और राष्ट्रीय एकता में है।
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय परिवार में उत्सव और गर्व का वातावरण बना रहा। तिरंगे के नीचे विद्यार्थियों ने देश की एकता, अखंडता और प्रगति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का भाव प्रदर्शित किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में जहां देश की विविधता दिखाई दी, वहीं देशभक्ति गीतों और राष्ट्रगान ने सभी को एक भावनात्मक सूत्र में बांध दिया। विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार को शुभकामना संदेश प्रेषित किया। उन्होंने देशवासियों और विश्वविद्यालय परिवार के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं।
सरला बिरला विश्वविद्यालय का यह स्वतंत्रता दिवस समारोह इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि **देशभक्ति केवल तिरंगे को सलामी देने तक सीमित नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाने, समाज के प्रति संवेदनशील रहने और राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान देने का नाम है।** विद्यार्थियों की जीवंत प्रस्तुतियों, राष्ट्रभक्ति के गीतों और प्रेरणादायक संबोधनों ने परिसर में राष्ट्रीय चेतना की लौ को और प्रखर किया। समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत की विविधता उसकी शक्ति है और युवा उस शक्ति को दिशा देकर विकसित, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
