
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता चम्पई सोरेन ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राज्य में झामुमो कार्यकर्ताओं की कथित गुंडागर्दी और छात्रों के साथ हुई मारपीट की घटनाओं का हवाला देते हुए झारखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और आम लोगों के साथ-साथ छात्रों की आवाज को भी दबाने का प्रयास किया जा रहा है। चम्पई सोरेन ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों को संरक्षण मिलने के कारण प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। छात्रों के आंदोलन के दौरान हुई कथित मारपीट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इशारे पर की गयी। उन्होंने सरकार से छात्रों के साथ हुए व्यवहार को लेकर जवाब देने की मांग की। पूर्व मुख्यमंत्री ने जेपीएससी में कथित घोटाले का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि उनके मुख्यमंत्री रहते जेपीएससी में सामने आये मामलों की जांच के लिए एसआईटी गठित की गयी थी। उनका कहना है कि परीक्षा एवं नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
चम्पई सोरेन ने जेपीएससी की पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य की गिरफ्तारी की मांग भी की। उन्होंने कहा कि मामले में अजिता भट्टाचार्य के तत्कालीन पीए ब्रजकुमार राम की गिरफ्तारी हुई है। आरोप लगाया कि यदि पैसे लेने का मामला सामने आया है तो इसकी जांच इस बिंदु से भी होनी चाहिए कि कथित तौर पर लिया गया पैसा किसके लिए लिया गया था। उन्होंने अजिता भट्टाचार्य की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच और गिरफ्तारी की मांग की।
उन्होंने कहा कि जेपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले हजारों छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता की किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों के हितों को प्राथमिकता देते हुए उनके सवालों का समाधान करना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में युवाओं के बीच सरकार के प्रति असंतोष बढ़ रहा है। जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से छात्र आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को आंदोलनरत छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए, न कि बल प्रयोग या दमनात्मक कार्रवाई का सहारा लेना चाहिए। चम्पई सोरेन ने राज्य सरकार पर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि सरकार इस जिम्मेदारी को निभाने में विफल रहती है तो संवैधानिक व्यवस्था के तहत आवश्यक कदम उठाये जाने चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। हालांकि, चम्पई सोरेन के आरोपों पर सरकार या झामुमो की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है। राष्ट्रपति शासन की मांग और जेपीएससी प्रकरण को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक विवाद और तेज होने की संभावना है।
