
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की सीजीएल परीक्षा को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शोभा यादव ने जेएसएससी के प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार के पद पर बने रहने पर सवाल उठाते हुए तत्काल इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि सितंबर 2024 में हुई जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा उनके कार्यकाल में आयोजित हुई थी। परीक्षा के बाद उठे विवाद और अनियमितताओं के आरोपों के बीच इसे रद्द करना पड़ा। ऐसे में परीक्षा सुधार समिति में प्रशांत कुमार को शामिल किया जाना छात्रों के साथ अन्याय और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल है।
भाजपा प्रवक्ता शोभा यादव ने कहा कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी थी। अभ्यर्थियों ने परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर विरोध किया था। विवाद बढ़ने के बाद सरकार को परीक्षा रद्द करने का फैसला लेना पड़ा। परीक्षा रद्द होने से अभ्यर्थियों की वर्षों की तैयारी प्रभावित हुई और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए। श्रीमती यादव ने कहा कि किसी भी भर्ती परीक्षा में पारदर्शिता सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि एक छोटी सी गड़बड़ी भी हजारों युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस अवधि में परीक्षा आयोजित हुई और बाद में विवाद के कारण उसे रद्द करना पड़ा, उसी अवधि के जिम्मेदार अधिकारी को परीक्षा सुधार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका कैसे दी जा सकती है। भाजपा ने इसे हितों के टकराव का मामला बताते हुए प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति से तत्काल हटाने की मांग की है। श्रीमती यादव ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति से हटाने और जेएसएससी से जुड़े पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। भाजपा का कहना है कि जब भर्ती परीक्षा को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हों और लाखों अभ्यर्थियों के हित प्रभावित हुए हों, तब जांच ऐसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए, जिस पर किसी प्रकार का राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव नहीं हो।
उन्होंने कहा कि जेएसएससी-सीजीएल विवाद को केवल परीक्षा रद्द होने तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। जांच का दायरा परीक्षा के आयोजन, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, शिकायतों के निस्तारण और जिम्मेदारी तय करने तक होना चाहिए। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कथित अनियमितता के लिए कौन जिम्मेदार था और परीक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शोभा यादव ने प्रशांत कुमार के प्रशासनिक कार्यकाल को लेकर उठाए गए वित्तीय मामलों तथा जल संसाधन विभाग से संबंधित प्रकरणों पर भी सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि यदि इन मामलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो सरकार को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कोई गड़बड़ी प्रमाणित होती है तो संबंधित व्यक्ति की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। श्रीमती यादव ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में बार-बार विवाद होने से युवाओं में व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र वर्षों तक अपना समय और संसाधन लगाते हैं। परीक्षा रद्द होने की स्थिति में उन्हें दोबारा तैयारी करनी पड़ती है और उम्र सीमा जैसी व्यावहारिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार वास्तव में छात्रों के हित और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता के प्रति गंभीर है तो उसे तत्काल प्रशांत कुमार से प्रभारी अध्यक्ष पद से इस्तीफा लेना चाहिए। जांच पूरी होने तक उन्हें ऐसी किसी भी समिति या प्रक्रिया से दूर रखा जाना चाहिए, जिसमें उनके कार्यकाल से जुड़े फैसलों की समीक्षा होनी है।
भाजपा प्रवक्ता शोभा यादव ने मांग की है कि जेएसएससी-सीजीएल प्रकरण की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराई जाए, परीक्षा व्यवस्था में हुई कथित गड़बड़ियों की तह तक पहुंचा जाए और दोषियों की जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि ’’लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े मामले में सरकार की चुप्पी स्वीकार्य नहीं है।’’ भाजपा इस मुद्दे पर युवाओं के साथ खड़ी है और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित होने तक आवाज उठाती रहेगी।
