
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: राजधानी रांची में आयोजित जेसोवा के दीपावली मेले में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है। दीपावली से पहले खरीदारी को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। खासकर महिलाओं और बच्चों में कपड़ों, पारंपरिक परिधानों और फैशन से जुड़े उत्पादों को लेकर विशेष क्रेज है। मेले में लगे विभिन्न स्टॉल पर ग्राहकों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। कोई अपनी पसंद के परिधान तलाश रहा है तो कोई घर की सजावट और दीपावली की तैयारियों के लिए जरूरी सामान खरीद रहा है। लेकिन इस मेले की खासियत केवल खरीदारी और रौनक तक सीमित नहीं है। यह महिला उद्यमियों को अपने हुनर और कारोबार के दम पर आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान कर रहा है। जेसोवा मेला महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और छोटे कारोबार को बाजार उपलब्ध कराने का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। यहां महिलाएं अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं। इससे उन्हें न केवल बिक्री का अवसर मिल रहा है, बल्कि अपने उत्पादों की पहचान बनाने और कारोबार का विस्तार करने में भी मदद मिल रही है। अलग-अलग क्षेत्रों की कला, संस्कृति, खान-पान और पारंपरिक उत्पादों को एक ही छत के नीचे देखने का अवसर मिलने से मेले का आकर्षण और बढ़ गया है।
’’मिथिलांचल के मखाने को ग्लोबल पहचान दिलाने की पहल’’
मेले में रूपम मखाना का स्टॉल भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। महिला उद्यमी चांदनी झा ने मुखर संवाद को बताया कि मखाना मिथिलांचल की धरती की पहचान है, जो अब स्थानीय बाजार से निकलकर वैश्विक पहचान बना रहा है। पारंपरिक खान-पान और अपनी सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रूपम मखाना के माध्यम से इस उत्पाद को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मखाने की पौष्टिकता और उपयोगिता के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। जेसोवा जैसे मेले महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों की विशेषता बताने और नए ग्राहकों से जुड़ने का अवसर देते हैं। वहीं, स्टॉल से जुड़े अमित का कहना है कि मेले में केवल महिलाएं ही नहीं, बल्कि अन्य वर्गों के लोग भी खरीदारी में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। ग्राहकों की यह भागीदारी उद्यमियों का उत्साह बढ़ाती है। उनके अनुसार, ऐसे आयोजन छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में सहायक साबित होते हैं।
’’राजस्थानी परिधानों की झारखंड में बढ़ रही मांग’’
महिला उद्यमी नैंसी सिंह बताती हैं कि वह प्रत्येक वर्ष जेसोवा मेले में अपना स्टॉल लगाती हैं। इस आयोजन से उन्हें आत्मनिर्भर बनने और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिली है। वह राजस्थानी परिधानों के माध्यम से राजस्थान की पारंपरिक वेशभूषा और संस्कृति को झारखंड के लोगों तक पहुंचा रही हैं। उनका कहना है कि झारखंड के ग्राहकों में भी राजस्थानी परिधानों को लेकर लगातार दिलचस्पी देखने को मिल रही है। लोग इन परिधानों के रंग, डिजाइन और पारंपरिक कारीगरी को पसंद कर रहे हैं। ग्राहकों की यह रुचि उनके कारोबार को प्रोत्साहित करती है। मेले में सजे रंग-बिरंगे परिधान और आकर्षक कपड़ों के स्टॉल महिलाओं के लिए विशेष आकर्षण बने हुए हैं। दीपावली और त्योहारों के मद्देनजर लोग अपनी पसंद के अनुसार कपड़ों की खरीदारी कर रहे हैं। पारंपरिक परिधानों के साथ-साथ आधुनिक फैशन के कपड़ों की भी मांग देखने को मिल रही है। बच्चों के लिए उपलब्ध आकर्षक कपड़े भी अभिभावकों को अपनी ओर खींच रहे हैं।
’’बच्चों और महिलाओं के कपड़ों की खरीदारी को लेकर उत्साह’’
महिलाओं और बच्चों के कपड़ों का स्टॉल लगाने वाले प्रशांत सिंह भी मेले में ग्राहकों की दिलचस्पी से खासे उत्साहित हैं। उनका कहना है कि दीपावली से पहले खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंच रहे हैं। कपड़ों और परिधानों को लेकर ग्राहकों की रुचि कारोबारियों के लिए सकारात्मक संकेत है। ऐसे आयोजनों से उन्हें अपने उत्पादों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।
मेले में केवल कपड़े और खान-पान से जुड़े उत्पाद ही नहीं, बल्कि घरेलू उपयोग की वस्तुओं, सजावटी सामान और हस्तनिर्मित उत्पादों के भी कई स्टॉल लगाए गये हैं। अलग-अलग क्षेत्रों की महिला उद्यमी अपने उत्पादों के साथ यहां पहुंची हैं। इससे ग्राहकों को एक ही स्थान पर विविध उत्पादों की खरीदारी का विकल्प मिल रहा है। साथ ही स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों को भी बाजार में पहचान मिल रही है।
’’महिला स्वावलंबन और उद्यमिता को मिल रहा बढ़ावा’’
जेसोवा मेले की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह महिलाओं को केवल उत्पाद बेचने का अवसर नहीं देता, बल्कि उन्हें कारोबारी पहचान बनाने का मंच भी उपलब्ध कराता है। घर या छोटे स्तर से अपना व्यवसाय शुरू करने वाली महिलाओं के लिए ऐसे आयोजन संभावित ग्राहकों से सीधे जुड़ने का माध्यम बनते हैं। उन्हें अपने उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन और कीमत के प्रति ग्राहकों की प्रतिक्रिया जानने का अवसर मिलता है। इससे भविष्य में कारोबार को बेहतर तरीके से संचालित करने और उसका विस्तार करने में मदद मिलती है। कुल मिलाकर, जेसोवा मेले में दीपावली की खरीदारी के उत्साह के साथ महिला उद्यमिता की नई तस्वीर भी दिखाई दे रही है। एक ओर महिलाएं और बच्चे अपनी पसंद के कपड़ों और परिधानों की खरीदारी में जुटे हैं, तो दूसरी ओर महिला उद्यमी अपने हुनर और मेहनत के बूते आर्थिक स्वावलंबन की राह मजबूत कर रही हैं। मेले की बढ़ती रौनक और ग्राहकों की भागीदारी यह दर्शाती है कि ऐसे आयोजन खरीदारी के साथ-साथ महिलाओं को व्यावसायिक पहचान और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
