एसबीयू में विधिक सहायता क्लिनिक का उद्घाटन, जरूरतमंदों को मिलेगी मुफ्त कानूनी मदद, ’’मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वर्चुअल माध्यम से किया उद्घाटन, विधि के विद्यार्थियों को मिलेगा व्यावहारिक अनुभव; न्याय को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की पहल’’

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’’मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः’’

रांची: न्याय तक आम लोगों की पहुंच सुनिश्चित करने और समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में सरला बिरला विश्वविद्यालय (एसबीयू), रांची ने महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय के विधि विभाग एवं विधि एवं विधिक अध्ययन संकाय की ओर से स्थापित विधिक सहायता क्लिनिक (लीगल एड क्लिनिक) का उद्घाटन 2 नवंबर 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वर्चुअल माध्यम से किया। यह उद्घाटन झारखंड के देवघर स्थित सिविल कोर्ट में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के विधिक सेवा शिविर मॉड्यूल के तहत आयोजित सशक्तीकरण शिविर के दौरान किया गया। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर लोगों को कानूनी जानकारी एवं सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि संसाधनों की कमी किसी व्यक्ति के न्याय पाने के रास्ते में बाधा न बने।
इस अवसर पर सर्वाेच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति चंद्रशेखर एवं न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं, झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद तथा झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति रोंगन मुखोपाध्याय विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में झारखंड उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों एवं गणमान्य व्यक्तियों की भी उपस्थिति रही।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (विधिक सेवा क्लिनिक) विनियम, 2011 के अनुरूप स्थापित यह क्लिनिक विधि के विद्यार्थियों के लिए केवल शैक्षणिक गतिविधि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें समाज की वास्तविक कानूनी समस्याओं को समझने और उनके समाधान की प्रक्रिया से जुड़ने का अवसर भी देगा। विशेषज्ञों एवं विधिक क्षेत्र के जानकारों के मार्गदर्शन में विद्यार्थी कानूनी परामर्श, विधिक सहायता, वकालत, जागरूकता अभियान और सामुदायिक सेवा से संबंधित कार्यों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। इससे उनकी सैद्धांतिक पढ़ाई और वास्तविक न्यायिक प्रक्रिया के बीच की दूरी कम होगी। क्लिनिक का एक प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में रहने वाले गरीब, वंचित, कमजोर और हाशिए पर खड़े लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। अक्सर जानकारी के अभाव और आर्थिक कठिनाइयों के कारण जरूरतमंद लोग अपने अधिकारों तथा उपलब्ध कानूनी उपायों का लाभ नहीं उठा पाते। ऐसे लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रांची के सहयोग से विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम और सामुदायिक संपर्क अभियान चलाये जायेंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों को उनके अधिकारों, कानूनों और न्याय प्राप्त करने के उपलब्ध माध्यमों की जानकारी दी जायेगी। इस पहल का लाभ जहां जरूरतमंद लोगों को कानूनी जानकारी और सहायता के रूप में मिलेगा, वहीं विधि के विद्यार्थियों को सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने का अवसर प्राप्त होगा। क्लिनिक के माध्यम से विद्यार्थियों में व्यावसायिक नैतिकता, संवैधानिक मूल्यों, मानवीय संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने पर भी जोर दिया जायेगा। विश्वविद्यालय की यह पहल उच्च शिक्षा को समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति विजय कुमार दलान तथा राज्यसभा सांसद सह निदेशक, प्लानिंग एंड डेवलपमेंट डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने विश्वविद्यालय परिवार को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस प्रयास को शिक्षा और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा न्याय को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में सार्थक कदम बताया। विश्वविद्यालय के विधि विभाग ने इस पहल को सफल बनाने में सहयोग के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश, सर्वाेच्च न्यायालय एवं झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, झालसा, डीएलएसए रांची, न्यायिक समुदाय और विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। विश्वविद्यालय की इस पहल से उम्मीद जतायी जा रही है कि विधिक जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा और जरूरतमंद लोगों के लिए न्याय तक पहुंचने का रास्ता अधिक सुगम होगा।
एसबीयू परिसर में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक, कुलपति प्रो. सी. जगनाथन, कुलसचिव प्रो. एस.बी. दंडीन सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी एवं शिक्षक उपस्थित रहे। इस मौके पर रांची के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रवि नारायण तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), रांची के अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद थे। न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति ने विश्वविद्यालय की इस पहल को न्यायिक व्यवस्था और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में रेखांकित किया।

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