लोक लेखा समितियों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर जोर, सभपति मनोज कुमार यादव ने दिया 125 वर्ष पर विशेष सम्मेलन का सुझाव, ’’तिरुवनंतपुरम में राष्ट्रीय सम्मेलन में झारखंड का प्रतिनिधित्व, हर महीने कम से कम तीन बैठकें आयोजित करने और लंबित ऑडिट टिप्पणियों के निपटारे का संकल्प’’

Jharkhand उत्तरप्रदेश झारखण्ड देश बिहार राजनीति शिक्षा जगत


मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः
रांची: सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और सरकारी खर्चों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लोक लेखा समितियों को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। केरल के तिरुवनंतपुरम में 3 एवं 4 नवंबर को आयोजित संसद तथा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों के अध्यक्षों एवं सभापतियों के दो दिवसीय सम्मेलन में इस दिशा में कई महत्वपूर्ण संकल्प पारित किए गए। झारखंड विधानसभा की लोक लेखा समिति के सभापति मनोज कुमार यादव ने सम्मेलन में राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए समिति की कार्यप्रणाली में सुधार और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर अपने सुझाव रखे। सम्मेलन में मनोज कुमार यादव के साथ समिति के सदस्य नमन बिक्सल कोंगाड़ी, जगत माझी एवं समीर कुमार मोहंती तथा विधानसभा के उपसचिव अनूप लाल शामिल हुए। अपने व्याख्यान में मनोज कुमार यादव ने कहा कि वर्ष 1921 से लोक लेखा समिति सार्वजनिक व्यय में पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि समिति के 125 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाना चाहिए। इसमें समिति की ऐतिहासिक भूमिका और उपलब्धियों की समीक्षा के साथ भविष्य की कार्ययोजना पर भी विचार होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बदलते दौर में लोक लेखा समितियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए विधानसभा की कार्यप्रणाली में आधुनिक तकनीक का उपयोग जरूरी है। समिति की कार्यवाहियों और प्रतिवेदनों की समयबद्ध समीक्षा, सार्वजनिक धन के आवंटन एवं उपयोग की गहन जांच और लंबित लेखा परीक्षा टिप्पणियों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने विभिन्न राज्यों की समितियों के बीच अनुभवों और सर्वाेत्तम प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान तथा लेखा परीक्षा प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए निश्चित समय-सीमा निर्धारित करने का भी सुझाव दिया। सम्मेलन में लोक लेखा समितियों के कामकाज को गति देने के लिए राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं में प्रत्येक महीने कम से कम तीन बैठकें आयोजित करने का संकल्प पारित किया गया। इसके अलावा लंबित ऑडिट टिप्पणियों की जांच कर उन पर उचित निर्णय लेने तथा आवश्यकतानुसार उप-समितियों के गठन पर विचार करने का निर्णय लिया गया। सम्मेलन में इस बात पर सहमति बनी कि सरकारी खर्चों की प्रभावी निगरानी और लेखा परीक्षा से जुड़ी आपत्तियों के समयबद्ध निपटारे से वित्तीय अनुशासन को मजबूत किया जा सकता है। दो दिवसीय सम्मेलन का समापन लोक लेखा समितियों की कार्यक्षमता बढ़ाने, सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता लाने और सरकारी तंत्र की जवाबदेही सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *