किताबी ज्ञान से आगे अनुभव आधारित शिक्षा पर जोर, शैक्षणिक दौरों से विद्यार्थियों को मिल रहे नए अवसर, ’’आईआईटी दिल्ली से लेकर बेंगलुरु के वैज्ञानिक संस्थानों तक पहुंच रहे एसबीयू के विद्यार्थी, राजस्थान के अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव में भी दर्ज कराई सहभागिता’’

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मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आधुनिक तकनीक, अनुसंधान, उद्योग जगत और साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में सरला बिरला विश्वविद्यालय (एसबीयू), रांची लगातार पहल कर रहा है। इसी क्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों के लिए देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों, वैज्ञानिक प्रतिष्ठानों और साहित्यिक आयोजनों के शैक्षणिक भ्रमण की व्यवस्था की गई है। इन पहलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को वास्तविक कार्यक्षेत्र का अनुभव प्रदान करने के साथ उनके ज्ञान, कौशल, आत्मविश्वास और रचनात्मक क्षमता का विकास करना है।
विश्वविद्यालय के सिविल एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी विभाग के 23 विद्यार्थियों ने हाल ही में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने संस्थान की आधुनिक प्रयोगशालाओं और अनुसंधान सुविधाओं का अवलोकन किया। साथ ही, विशेषज्ञों से उच्च शिक्षा, शोध, छात्रवृत्ति और करियर की संभावनाओं के संबंध में मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अनुभव ने विद्यार्थियों को अपने विषय से जुड़ी आधुनिक तकनीकों और अनुसंधान की संभावनाओं को करीब से समझने का अवसर दिया।
इसी कड़ी में विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के एमसीए एवं बीटेक के 30 विद्यार्थी 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक बेंगलुरु के शैक्षणिक दौरे पर हैं। इस भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), आईटी कंपनियों, स्टार्टअप्स और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से परिचित कराने की योजना है। इस दौरे के माध्यम से विद्यार्थियों को तकनीकी विकास, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और औद्योगिक कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें अपने शैक्षणिक ज्ञान के व्यावहारिक उपयोग, भविष्य की तकनीकी चुनौतियों और रोजगार के बदलते स्वरूप को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है। तकनीकी संस्थानों और उद्योगों से परिचय विद्यार्थियों को अपने करियर की दिशा तय करने में भी उपयोगी साबित हो सकता है।

तकनीकी शिक्षा के साथ साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विकास को भी महत्व देते हुए विश्वविद्यालय के अंग्रेजी संकाय के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने राजस्थान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव ‘वर्ड्स बियॉन्ड बॉर्डर्स’ में भाग लिया। इस सहभागिता का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न साहित्यिक परंपराओं, सांस्कृतिक विविधताओं और विचारों से परिचित कराना है। साहित्यिक आयोजनों में सहभागिता विद्यार्थियों की भाषा संबंधी दक्षता, अभिव्यक्ति क्षमता, आलोचनात्मक चिंतन और रचनात्मक दृष्टिकोण को विकसित करने में सहायक होती है। ऐसे मंच उन्हें विभिन्न विचारधाराओं और अनुभवों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। इससे उनके व्यक्तित्व विकास के साथ संवाद और विचार-विमर्श की क्षमता भी मजबूत होती है।
विश्वविद्यालय की इन पहलों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कई विद्यार्थी पहली बार झारखंड से बाहर शैक्षणिक भ्रमण पर गए हैं। उनके लिए यह अनुभव केवल नए संस्थानों को देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग शैक्षणिक वातावरण, कार्यसंस्कृति और सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश को समझने का अवसर भी है। ऐसे अनुभव विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की भावना के अनुरूप विश्वविद्यालय शिक्षा को कक्षा की चारदीवारी से बाहर ले जाकर अनुभव, प्रयोग, शोध और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है, ताकि वे बदलती तकनीकी और व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।

विद्यार्थियों के शैक्षणिक दौरों और विभिन्न ज्ञानवर्धक गतिविधियों पर सरला बिरला विश्वविद्यालय के माननीय प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान, महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक, कुलपति प्रो. सी. जगनाथन तथा राज्यसभा सांसद सह निदेशक, प्लानिंग एंड डेवलपमेंट डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने प्रसन्नता व्यक्त की है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल, आत्मविश्वास और वैश्विक दृष्टिकोण से सशक्त बनाना है। देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों, वैज्ञानिक प्रतिष्ठानों, उद्योगों और साहित्यिक मंचों से जुड़ने के अवसर इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा हैं।
विश्वविद्यालय की ये पहल उच्च शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों के समग्र विकास से जोड़ने की कोशिश को दर्शाती है। इससे विद्यार्थियों को अपने विषय की व्यावहारिक समझ विकसित करने, नए अवसरों की पहचान करने और भविष्य की चुनौतियों के लिए स्वयं को तैयार करने का अवसर मिल रहा है। विश्वविद्यालय की अपेक्षा है कि ऐसे अनुभव विद्यार्थियों को सक्षम पेशेवर बनाने के साथ राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने के लिए भी प्रेरित करेंगे।

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