
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
लोहरदगा: सड़क किसी भी गांव के विकास की पहली जरूरत होती है। बेहतर सड़क से जहां आवागमन आसान होता है, वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार के अवसरों तक पहुंच भी सुगम होती है। लेकिन लोहरदगा जिले के कुडू प्रखंड स्थित जिलिंग गांव के ग्रामीण पिछले 42 वर्षों से जर्जर सड़क की समस्या से जूझ रहे हैं। करीब ढाई किलोमीटर लंबी यह सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग-39 (एनएच-39) से जुड़ती है और आसपास के चार से पांच गांवों के लोगों के आवागमन का प्रमुख माध्यम है। इसके बावजूद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से इस सड़क के निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। सड़क की बदहाली का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। गांव के लोगों को जरूरी कामों के लिए आने-जाने में परेशानी उठानी पड़ती है। किसानों को अपने खेतों और कृषि कार्यों से जुड़े सामान के परिवहन में दिक्कत होती है, वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों को भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों के लिए यह सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि उनके जीवन और गांव के विकास से जुड़ा अहम रास्ता है।
’’आश्वासन मिलते हैं, लेकिन सड़क निर्माण का इंतजार बरकरार’’
जिलिंग गांव के लोगों के मुताबिक, जब भी सड़क की बदहाली का मुद्दा उठाया जाता है, तब अस्थायी तौर पर कुछ गाड़ियों में सामग्री भेजकर या छोटे-मोटे काम कराकर मामले को टालने की कोशिश की जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी पहल से कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन इससे वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलता। उनकी मांग है कि सड़क की मरम्मत के बजाय जरूरत के अनुसार इसका पक्के तौर पर निर्माण कराया जाए, ताकि लंबे समय तक लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। ग्रामीणों की नाराजगी का एक बड़ा कारण चुनाव के दौरान किए जाने वाले वादे भी हैं। उनका आरोप है कि चुनाव आते ही मंत्री, विधायक और दूसरे जनप्रतिनिधि गांव पहुंचते हैं तथा सड़क बनवाने का आश्वासन देते हैं। लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद इस मुद्दे पर अपेक्षित पहल नहीं दिखाई देती। नतीजतन, हर चुनाव के साथ उम्मीद जगती है और फिर ग्रामीणों को निराशा का सामना करना पड़ता है। हालांकि, सड़क निर्माण को लेकर संबंधित विभाग की ओर से अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और परियोजना में देरी की वजह क्या है, यह स्पष्ट नहीं है।
’’बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर भी पड़ रहा असर’’
सड़क की बदहाली का सबसे गंभीर असर गांव के बच्चों की शिक्षा पर पड़ने की आशंका है। स्कूल जाने वाले बच्चों को प्रतिदिन इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। खराब सड़क के कारण उन्हें आने-जाने में परेशानी होती है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि सड़क बेहतर हो जाए, तो बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना आसान होगा और उनकी पढ़ाई भी नियमित रूप से जारी रखने में मदद मिलेगी।
अभिभावकों को उम्मीद है कि सड़क बनने से बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे। ग्रामीण क्षेत्र में अच्छी सड़क होने से विद्यार्थियों के लिए स्कूल तक पहुंच आसान होती है। साथ ही, शिक्षकों और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों का गांव तक पहुंचना भी सुविधाजनक हो सकता है। ऐसे में सड़क निर्माण को ग्रामीण अपने बच्चों के भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं।
’’किसानों को राहत और गांव के विकास की उम्मीद’’
जिलिंग गांव और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के लिए भी यह सड़क महत्वपूर्ण है। कृषि कार्यों के लिए जरूरी सामान लाने और उपज को बाजार तक पहुंचाने में बेहतर सड़क की अहम भूमिका होती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क दुरुस्त होने से किसानों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों और आम लोगों को भी फायदा मिलेगा। आवागमन सुगम होने पर गांव का संपर्क मुख्य सड़क और आसपास के बाजारों से बेहतर हो सकेगा। ग्रामीण विकास के लिहाज से भी इस सड़क का निर्माण जरूरी माना जा रहा है। बेहतर संपर्क मार्ग से स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और दूसरी आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच आसान हो सकती है। चार-पांच गांवों की आवाजाही इसी रास्ते पर निर्भर होने के कारण सड़क की समस्या केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास की आबादी को भी प्रभावित करती है।
’’ग्रामीणों की मांग,अब आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहिए’’
42 वर्षों से सड़क की बदहाली झेल रहे ग्रामीण अब ठोस कार्रवाई चाहते हैं। उनकी मांग है कि संबंधित विभाग सड़क की वर्तमान स्थिति का निरीक्षण करे, निर्माण की आवश्यकता का आकलन करे और इसके लिए ठोस योजना तैयार करे। साथ ही, सड़क निर्माण की प्रक्रिया, स्वीकृति और काम शुरू होने की संभावित समय-सीमा के बारे में भी ग्रामीणों को जानकारी दी जाए। ग्रामीणों का सवाल है कि जब राष्ट्रीय राजमार्ग-39 से जुड़ी करीब ढाई किलोमीटर की सड़क चार-पांच गांवों के लिए इतनी महत्वपूर्ण है, तो इसके निर्माण में इतनी लंबी देरी क्यों हो रही है? उनका कहना है कि गांव के विकास के लिए केवल चुनावी घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। जरूरी है कि उन घोषणाओं को जमीन पर उतारा जाए।
अब देखना यह है कि सरकार, जनप्रतिनिधि और संबंधित विभाग जिलिंग गांव के लोगों की इस पुरानी मांग पर कब तक कार्रवाई करते हैं। फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें सड़क निर्माण पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और आने वाले समय में जर्जर सड़क की जगह एक बेहतर रास्ता बनेगा, जिससे बच्चों की पढ़ाई, किसानों के कामकाज और गांव के विकास को नई दिशा मिल सकेगी।

