
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: मोरहाबादी का योग सेंटर अब सिर्फ योग, प्राणायाम और शारीरिक स्वास्थ्य साधना का केंद्र नहीं रह गया है। यहां आने वाले योग साधकों के बीच धीरे-धीरे ऐसा आत्मीय रिश्ता बन गया है, जिसमें सुख-दुख केवल व्यक्तिगत नहीं रह जाते, बल्कि सभी के साझा अनुभव बन जाते हैं। कभी किसी के बिछड़ने का गम आंखों को नम कर देता है तो कभी किसी की खुशी पूरे योग परिवार के चेहरे पर मुस्कान बिखेर देती है। यही वजह है कि मोरहाबादी का यह योग सेंटर आज एक परिवार से भी बढ़कर अपनापन, स्नेह और संवेदनाओं का एहसास कराने लगा है। इस आत्मीय रिश्ते की झलक एक बार फिर सोमवार को उस समय देखने को मिली, जब योग सेंटर में ’’‘मुखर संवाद’ के संपादक अशोक कुमार का जन्मदिन’’ पूरे उत्साह और आत्मीयता के साथ मनाया गया। दो दिन पहले इसी स्थान पर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित रहे स्वर्गीय वासुदेव प्रसाद सिन्हा को श्रद्धांजलि देकर योग साधकों ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त की थीं। तब वातावरण गमगीन था, आंखों में नमी थी और हर व्यक्ति अपने साथी को याद कर भावुक था। लेकिन आज उसी योग सेंटर में खुशी की रौनक थी। यह बदलाव इस बात का प्रमाण था कि यहां लोग केवल साथ योग नहीं करते, बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी भी बन चुके हैं।
अशोक कुमार के जन्मदिन के अवसर पर योग साधकों ने उन्हें परिवार के सदस्य की तरह सम्मान और स्नेह दिया। कार्यक्रम के दौरान उनका ’’तिलक लगाकर स्वागत’’ किया गया। इसके बाद उड़ीसा की प्रसिद्ध मिठाई ’’छेनापोड़ा’’ से विशेष रूप से तैयार किया गया केक मंगाया गया। योग सेंटर के वातावरण में जब जन्मदिन का केक काटा गया तो वहां मौजूद सभी लोगों के चेहरे खुशी से खिल उठे। किसी के लिए यह महज जन्मदिन का आयोजन नहीं था, बल्कि अपनेपन और रिश्तों को महसूस करने का एक खूबसूरत अवसर था। इस दौरान उपस्थित लोगों ने अशोक कुमार को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और उनके स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। पूरे आयोजन में औपचारिकता से कहीं अधिक आत्मीयता दिखाई दी। ऐसा लग रहा था मानो योग सेंटर में आने वाले लोग वर्षों पुराने पारिवारिक रिश्तों की तरह एक-दूसरे से जुड़े हुए हों।
जन्मदिन समारोह में ’’गुरूजी के नाम से प्रसिद्ध गजेन्द्र सिंह’’, जीएसटी अधिकारी ’’सुनील कुमार सिन्हा’’, व्यवसायी ’’कमल अग्रवाल’’, रांची के प्रसिद्ध व्यवसायी ’’कमल सिंघानिया’’, ’’रतन वर्मा, ललित चौधरी, विनोद सिंह’’ और समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ’’मनोहर यादव’’,जीएसटी अधिकारी मुकीम अहमद सहित कई लोग मौजूद रहे। सभी ने अशोक कुमार के साथ अपनी आत्मीयता साझा की और जन्मदिन को यादगार बनाया।
कार्यक्रम के दौरान यह भी महसूस किया गया कि योग का अर्थ केवल शरीर को स्वस्थ और निरोग रखना नहीं है। योग मनुष्य को भीतर से जोड़ने का भी माध्यम है। नियमित रूप से एक साथ योग करने वाले लोगों के बीच जब संवाद बढ़ता है तो धीरे-धीरे सामाजिक और पारिवारिक संबंधों जैसी आत्मीयता पैदा होने लगती है। एक-दूसरे की परेशानियों को समझना, बीमारी में हालचाल पूछना, किसी उपलब्धि पर खुश होना और किसी के निधन पर साथ खड़े होकर संवेदना व्यक्त करनाकृये सभी भाव इस योग सेंटर की पहचान बनते जा रहे हैं।
दो दिन पहले जब राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वासुदेव प्रसाद सिन्हा को श्रद्धांजलि दी गई थी, तब योग साधकों ने उनके व्यक्तित्व और योगदान को याद करते हुए नम आंखों से उन्हें विदाई दी थी। आज उसी स्थान पर अशोक कुमार के जन्मदिन की खुशी साझा करते हुए यह संदेश भी सामने आया कि ’’जीवन में सुख और दुख दोनों आते-जाते रहते हैं, लेकिन एक-दूसरे का साथ ही उन क्षणों को अर्थ देता है।’’ मोरहाबादी का यह योग सेंटर इसलिए भी खास बनता जा रहा है क्योंकि यहां योग की चटाई पर केवल शरीर नहीं, बल्कि रिश्ते भी आकार लेते दिखाई देते हैं। सुबह की योग साधना के बाद होने वाली बातचीत, हंसी-मजाक और एक-दूसरे के प्रति चिंता अब इस समूह के जीवन का हिस्सा बन चुकी है। यहां स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक शांति और आंतरिक खुशी पाने का भी प्रयास होता है। अशोक कुमार के जन्मदिन समारोह ने एक बार फिर यह साबित किया कि ’’सच्चा योग केवल शरीर को मोड़ने और सांसों को साधने का अभ्यास नहीं, बल्कि मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने की साधना भी है।’’ जहां गम में आंखें नम हों और खुशी में चेहरे खिल उठें, वहां रिश्ते सिर्फ परिचय नहीं रहते, वे परिवार का रूप ले लेते हैं। मोरहाबादी का योग सेंटर आज इसी मानवीय संवेदना और आत्मीयता की एक खूबसूरत मिसाल बनता जा रहा है।
