

मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांचीरू राज्यसभा की 24 खाली हो रही सीटों पर चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को द्विवार्षिक चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि 10 राज्यों की 24 सीटों पर 18 जून को मतदान कराया जाएगा। इसी दिन मतगणना भी होगी। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 1 जून को अधिसूचना जारी होगी, जबकि 8 जून तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 11 जून तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। आवश्यकता पड़ने पर 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान कराया जाएगा। इस चुनाव में झारखंड की दो सीटों पर भी मतदान होना है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने उम्मीदवारों को लेकर रणनीति बनाने में जुट गए हैं। झारखंड में एक सीट नियमित चुनाव के तहत खाली हो रही है, जबकि दूसरी सीट को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। झारखंड में राज्यसभा की 2 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया है। चुनाव आयोग की तरफ जारी प्रेस नोट के अनुसार झारखंड के 2 सीटों के अलावा देश के 26 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव होंगे। झारखंड में एक राज्यसभा सीट पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के बाद से 2025 से ही खाली है। वहीं राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल भी 21 जून को खत्म होने वाला रहा है। चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
प्रत्याशी को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी कोई घोषणा नहीं की है। सत्ताधारी दलों झामुमो, कांग्रेस और राजद के बीच अभी सहमति बनाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। वर्तमान स्थिति के अनुसार एकजुटता दिखाने पर सत्ताधारी गठबंधन दोनों सीटें निकाल सकता है। लेकिन वहीं झारखंड में महागठबंधन के बीच एकता में राज्यसभा चुनाव के कारण दरार पड़ सकती है। चुनाव को लेकर जहां कांग्रेस के नेता छिटपुट दावेदारी कर रहे हैं वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा एकतरफा तैयारियों में जुटा हुआ है। झामुमो के कई नेता लगातार बयानबाजी कर कांग्रेस के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं। दूसरी ओर, राजनीतिक हलकों में टूट को लेकर जोरदार अफवाह फैलने के बाद पार्टी अपने संगठन को बचाने की कोशिशों में जुटी हुई है। अफवाह यह उड़ा था कि पार्टी दो गुटों में बंटकर टूटने जा रही है। तमाम शीर्ष नेताओं ने इस अफवाह का खंडन तो किया लेकिन कार्यकर्ताओं के मन में यह बात घर कर गई है। अभी कुछ दिनों पहले ही आधा दर्जन विधायकों ने संगठन के खिलाफ नई दिल्ली पहुंचकर आलाकमान से सीधी बात की और विभिन्न मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराया। इन परिस्थितियों में कांग्रेस फ्रंट फुट पर आकर राजनीति नहीं कर पा रही है। अपने झगड़ों में उलझी पार्टी के लिए झामुमो से आंख मिलाकर राज्यसभा सीट की दावेदारी करना संभव नहीं है।
