*देश को भनक तक नहीं लगी, मोदी सरकार ने चुपचाप बेच दी एक और सार्वजनिक संपत्ति: आलोक कुमार दूबे*

Jharkhand झारखण्ड देश राजनीति

*₹145 करोड़ की संपत्ति, ₹121 करोड़ में सौदा! आईएमपीसीएल की बिक्री पर उठे गंभीर सवाल*
+++++++++++++++++++++++++++++++++++++±+
मुखर संवाद के लिए शिल्पी यादव की रिपोर्ट
रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के निर्माण से जुड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी आईएमपीसीएल की बिक्री को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश को भनक तक नहीं लगी और मोदी सरकार ने एक और सार्वजनिक संपत्ति को निजी हाथों में सौंप दिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक आईएमपीसीएल की कुल परिसंपत्ति और शुद्ध संपत्ति का मूल्य लगभग 145 करोड़ रुपये था। कंपनी वर्षों से लाभ में कार्य कर रही थी और उसे मिनी रत्न का दर्जा भी प्राप्त था। ऐसे में मात्र 121 करोड़ रुपये में इसकी सौ प्रतिशत हिस्सेदारी निजी कंपनी को सौंपे जाने से मूल्यांकन प्रक्रिया, सार्वजनिक हित और सरकार की दीर्घकालिक नीतियों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि एक लाभकारी और रणनीतिक महत्व रखने वाली सार्वजनिक संस्था का मूल्य उसकी घोषित शुद्ध संपत्ति से भी कम पर निर्धारित किया जाता है, तो देश की जनता यह जानना चाहती है कि इस निर्णय का आधार क्या था और इससे राष्ट्रहित को क्या लाभ होने वाला है।

आलोक कुमार दूबे ने कहा कि आईएमपीसीएल केवल एक कंपनी नहीं थी, बल्कि देशभर के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य योजनाओं को आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवाएं उपलब्ध कराने वाली एक महत्वपूर्ण संस्था थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी वर्षों से लाभ में थी, उसके पास बड़ी संख्या में दवाओं के निर्माण के लाइसेंस थे तथा उसे सार्वजनिक क्षेत्र की एक सफल इकाई माना जाता था। इसके बावजूद सरकार द्वारा इसकी पूरी हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को सौंपे जाने से कई गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि जब लाभ कमाने वाली संस्थाओं को भी बेचा जा रहा है, तब देश की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर सरकार की नीति क्या है। यदि सार्वजनिक क्षेत्र की सफल संस्थाएं भी सुरक्षित नहीं हैं, तो देश की आर्थिक संपत्तियों का भविष्य क्या होगा?

आलोक कुमार दूबे ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार लगातार देश की सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने की नीति पर काम कर रही है। रेलवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों और अब स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं तक निजीकरण का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इससे न केवल रोजगार पर असर पड़ेगा बल्कि आम लोगों के हित भी प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा, “मोदी जी, देश को बख्श दीजिए। जनता ने आपको देश की संपत्तियां बेचने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें मजबूत बनाने के लिए चुना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक लाभ में चल रही संस्थाओं को निजी हाथों में सौंपना देशहित नहीं माना जा सकता। भाजपा की यह अंधाधुंध निजीकरण नीति देश का सत्यानाश कर देगी।”

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस बिक्री से जुड़े मूल्यांकन, निर्णय प्रक्रिया और सार्वजनिक हित से संबंधित सभी तथ्यों को देश के सामने रखा जाए तथा इस पूरे मामले पर जनता को स्पष्ट जवाब दिया जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *