
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः
नई दिल्ली: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक मामलों को लेकर देशभर में छात्रों के बढ़ते आक्रोश और विपक्ष के लगातार दबाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। शुक्रवार शाम शिक्षा मंत्रालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के 47 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया। इसके साथ ही कुछ अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने का भी निर्णय लिया गया है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि अगले एक महीने के भीतर एनटीए के पूरे ढांचे में व्यापक बदलाव किए जाएंगे, ताकि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया जा सके। शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार पेपर लीक प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए एजेंसी की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा की गई है। समीक्षा के बाद कई स्तरों पर जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की गई है। मंत्रालय का कहना है कि भविष्य में प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने, परीक्षा संचालन में तकनीकी सुरक्षा बढ़ाने तथा निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए नए प्रावधान लागू किए जाएंगे। इस बीच पेपर लीक मामले को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी ने भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना आंदोलन तेज कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि लगातार हो रही परीक्षा अनियमितताओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है और इसकी नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय को लेनी चाहिए। उधर, लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों से जारी अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से परीक्षा सुधार, प्रभावित अभ्यर्थियों को उचित राहत देने तथा इस पूरे मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वादों पर अमल नहीं हुआ तो भविष्य में फिर आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार देर रात सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पेपर लीक मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत दिया था। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को कानून के अनुसार कठोर सजा दिलाई जाएगी। इसके अगले ही दिन शिक्षा मंत्रालय की बैठक में बड़े फैसले लिए गए। पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार पहले ही ’’लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’’ लागू कर चुकी है। इस कानून के तहत पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के दोषी पाए जाने पर अधिकतम पांच वर्ष तक की कैद और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं संगठित गिरोह या माफिया से जुड़े मामलों में 10 वर्ष तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यदि किसी परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की संलिप्तता सामने आती है तो उस पर भी एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है तथा परीक्षा दोबारा कराने में आने वाली पूरी लागत भी संबंधित एजेंसी से वसूली जाएगी। सरकार के ताजा फैसलों को परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रस्तावित सुधार कितनी तेजी से लागू होते हैं और भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने में कितने प्रभावी साबित होते हैं। छात्रों और अभिभावकों को उम्मीद है कि सरकार की सख्त कार्रवाई से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और युवाओं के भविष्य के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा।
