
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांचीः जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार के साथ प्रस्तावित वार्ता के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल तय कर लिया है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आयोजित बैठक के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार के साथ होने वाली बातचीत में केवल छात्र प्रतिनिधि ही अपनी बात रखेंगे। पत्रकार और कानूनविद केवल अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका में उपस्थित रहेंगे तथा वार्ता में प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा नहीं लेंगे। आंदोलनकारी छात्रों ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह छात्रों का है और इसकी आवाज भी छात्र ही हैं। इसलिए सरकार के समक्ष आंदोलन से जुड़ी सभी मांगें, तथ्य और सुझाव केवल छात्र प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत किए जाएंगे। किसी अन्य व्यक्ति को छात्रों की ओर से बातचीत करने या पक्ष रखने का अधिकार नहीं होगा। जारी सूची के अनुसार प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र शामिल किए गए हैं। इनमें रविन्द्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविन्द्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, अंकित कुमार और शालू सिंह के नाम शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि इन प्रतिनिधियों का चयन आपसी सहमति से किया गया है ताकि सरकार के समक्ष आंदोलन का पक्ष एकजुट होकर रखा जा सके। छात्र नेताओं ने कहा कि सरकार के साथ होने वाली वार्ता पूरी तरह पारदर्शी और सार्वजनिक होनी चाहिए। उनका कहना है कि लंबे समय से जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में वार्ता का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि ठोस समाधान निकालना होना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल में दो वरिष्ठ पत्रकारों को भी शामिल किया गया है। इनमें रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी और वरिष्ठ पत्रकार विकास वर्मा अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा कानूनविद अजीत कुमार भी प्रतिनिधिमंडल के साथ रहेंगे। हालांकि छात्रों ने स्पष्ट किया है कि ये तीनों वार्ता के दौरान किसी प्रकार की बातचीत नहीं करेंगे और न ही सरकार के समक्ष छात्रों की ओर से कोई पक्ष रखेंगे। उनकी भूमिका केवल छात्रों को आवश्यक मार्गदर्शन देने और प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने तक सीमित रहेगी।
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि पत्रकारों और कानूनविदों की उपस्थिति से वार्ता की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी रहेगी तथा छात्रों को कानूनी और प्रक्रियागत मार्गदर्शन मिल सकेगा। साथ ही सरकार और छात्रों के बीच होने वाली बातचीत को लेकर किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति भी नहीं बनेगी। छात्रों ने यह भी दोहराया कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है। उन्होंने सरकार से अपेक्षा जताई कि वार्ता सकारात्मक माहौल में होगी और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
गौरतलब है कि जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित धांधली के आरोपों को लेकर पिछले कई दिनों से राजधानी रांची में छात्र आंदोलनरत हैं। आंदोलन के दौरान अभ्यर्थी लगातार परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठा रहे हैं। अब सरकार से प्रस्तावित वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल के गठन के बाद आंदोलन के अगले चरण पर सभी की नजरें टिकी हैं। छात्रों का कहना है कि वे बातचीत के माध्यम से समाधान चाहते हैं, लेकिन अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।
