राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वासुदेव प्रसाद सिन्हा को भावभीनी श्रद्धांजलि, योग सेंटर में श्रद्धांजलि सभा, दिवंगत की स्मृतियों को याद कर भावुक हुए मॉर्निंग वॉकर्स और योग साधक

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मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः—
गिरिडीह: भेलवा गांव निवासी, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित पंचायत सेवक रहे स्वर्गीय वासुदेव प्रसाद सिन्हा के निधन से उनके परिचितों, शुभचिंतकों और समाज के लोगों में शोक की लहर है। उनके निधन पर योग सेंटर में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। यहां नियमित रूप से योग करने वाले लोगों और मॉर्निंग वॉकर्स ने नम आंखों से उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनके साथ बिताए पलों और उनके सहज, सरल तथा सकारात्मक व्यक्तित्व को याद करते हुए कई लोग भावुक हो उठे। श्रद्धांजलि सभा का माहौल बेहद मार्मिक रहा। योग सेंटर से जुड़े लोगों ने कहा कि वासुदेव प्रसाद सिन्हा केवल एक सम्मानित कर्मी ही नहीं, बल्कि शिक्षा, समाजसेवा और सकारात्मक जीवनशैली के प्रति समर्पित व्यक्ति थे। उम्र के अंतिम पड़ाव तक उनकी सक्रियता और लोगों से आत्मीयता बनी रही। उनके नियमित संपर्क में रहने वाले लोगों ने कहा कि उनका सहज व्यवहार और हर किसी से अपनत्व के साथ मिलना उन्हें दूसरों से अलग बनाता था।
श्रद्धांजलि सभा में उनके चौथे पुत्र ’’सुनील कुमार सिन्हा’’ ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि बाबूजी ने अपना पूरा जीवन शिक्षा और समाजसेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने कार्यों को हमेशा पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाया। उनके कार्यों की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर हुई और उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि पिता का जीवन केवल परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उनके जाने से परिवार ने अपना मार्गदर्शक खो दिया है।
’’योग शिक्षक गजेंद्र प्रसाद सिंह’’ ने कहा कि वासुदेव प्रसाद सिन्हा जीवन के अंतिम पड़ाव तक बेहद सक्रिय और जिंदादिल रहे। उम्र बढ़ने के बावजूद उनके उत्साह और सकारात्मक सोच में कभी कमी नहीं आई। वह हमेशा लोगों को बेहतर जीवन जीने, स्वस्थ रहने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने कहा कि उनकी कर्मठता, अनुशासन और सकारात्मक सोच लंबे समय तक लोगों को प्रेरित करती रहेगी।
’’अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह’’ ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वासुदेव प्रसाद सिन्हा ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का उदाहरण रहा। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व का जाना समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की।

’’प्रसिद्ध व्यवसायी कमल सिंघानिया’’ ने कहा कि वासुदेव प्रसाद सिन्हा उम्र के अंतिम पड़ाव में भी सक्रिय रहे और लोगों से लगातार जुड़े रहे। उनके व्यक्तित्व में सकारात्मक ऊर्जा थी। उनके जीवन से समाज के लोगों को बहुत कुछ सीखने को मिला। उन्होंने कहा कि उनका निधन केवल परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के लिए भी बड़ी क्षति है।
’समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मनोहर कुमार यादव ने कहा है कि उम्र के अंतिम पड़ाव में भी उनकी सक्रियता हमें बेहद ही प्रभावित करती रही। वासुदेव प्रसाद सिन्हा हमेशा ही जीवन जीनेवाले युवा की तरह ही व्यवहार करते रहे।
श्रद्धांजलि सभा में ’ व्यवसायी कमल अग्रवाल, ललित चौधरी, राजेश खंडेलवाल, मुकीम अंसारी, व्यवसायी संजय कुमार पोद्दार, ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंता राजेश कुमार, संतना इंटर कॉलेज रांची के प्रोफेसर कौशलेश कुमार’’ समेत कई लोग मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके जीवन से जुड़ी स्मृतियों को साझा किया। सभा के दौरान कई ऐसे क्षण भी आए, जब उन्हें याद कर लोगों की आंखें नम हो गईं। नियमित रूप से योग और मॉर्निंग वॉक के लिए आने वाले लोगों ने कहा कि अब योग सेंटर में उनकी कमी हमेशा महसूस होगी। उनके साथ होने वाली बातचीत, आत्मीय मुस्कान और जीवन के प्रति उनका उत्साह लोगों की स्मृतियों में बना रहेगा।

श्रद्धांजलि सभा के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। ’’संजय कुमार पोद्दार’’ ने गायत्री मंत्र का सामूहिक उच्चारण कर दिवंगत आत्मा के लिए प्रार्थना कराई। लोगों ने कहा कि वासुदेव प्रसाद सिन्हा का जीवन इस बात की मिसाल है कि व्यक्ति अपने कर्म, सेवा और व्यवहार से समाज में ऐसी छाप छोड़ सकता है, जो उसके जाने के बाद भी बनी रहती है। शिक्षा, समाजसेवा, कर्मठता और सकारात्मक जीवनशैली से जुड़ी उनकी स्मृतियां लोगों के बीच लंबे समय तक जीवित रहेंगी। श्रद्धांजलि सभा में मौजूद हर व्यक्ति के मन में एक ही भाव थाकृ’’एक अच्छा इंसान चला गया, लेकिन उसके अच्छे कर्म और उसकी यादें हमेशा लोगों के बीच बनी रहेंगी।’’

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