
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
लखनऊ: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी के निधन से समाजवादी राजनीति में शोक की लहर है। शनिवार को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लखनऊ के निशातगंज स्थित मेट्रो सिटी अपार्टमेंट पहुंचे और रामगोविन्द चौधरी के पार्थिव शरीर पर समाजवादी पार्टी का झंडा रखकर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। इस दौरान अखिलेश यादव भावुक नजर आए।
रामगोविन्द चौधरी का शुक्रवार रात लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में उपचार के दौरान निधन हो गया। वह करीब 73-74 वर्ष के थे। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे चौधरी का उपचार लखनऊ के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा था। उनके निधन की खबर सामने आते ही बलिया से लेकर लखनऊ तक समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गयी। अखिलेश यादव ने चौधरी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें समाजवादी पार्टी का वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष बताते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में संबल मिलने की कामना की। अंतिम दर्शन के दौरान पार्थिव शरीर पर पार्टी का झंडा रखना सपा के भीतर चौधरी के राजनीतिक योगदान और संगठन से उनके लंबे जुड़ाव का प्रतीक भी रहा।
रामगोविन्द चौधरी का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। बलिया जिले में जन्मे चौधरी ने छात्र जीवन में ही जनसरोकारों और लोकतांत्रिक आंदोलनों से जुड़कर अपनी राजनीतिक पहचान बनायी। आपातकाल के दौर में भी उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष किया और जेल गये। बाद के वर्षों में उनका जुड़ाव समाजवादी आंदोलन के प्रमुख नेताओं से हुआ। वर्ष 1977 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव जीता और इसके बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे। उन्होंने चिलकहर और बांसडीह विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया तथा आठ बार विधायक रहे। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकारों में उन्होंने मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, बाल विकास एवं पुष्टाहार, बेसिक शिक्षा, समाज कल्याण और पंचायती राज जैसे विभागों की जिम्मेदारी उनके राजनीतिक जीवन का हिस्सा रही। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद रामगोविन्द चौधरी को उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिली। 2017 से 2022 तक उन्होंने इस पद पर रहते हुए सदन में सरकार की नीतियों और जनसमस्याओं से जुड़े मुद्दे उठाये। उनकी पहचान विधानसभा में प्रभावी वक्ता और तर्क के साथ अपनी बात रखने वाले वरिष्ठ राजनेता के रूप में रही।
रामगोविन्द चौधरी चौधरी का राजनीतिक जीवन केवल पदों तक सीमित नहीं रहा। समाजवादी आंदोलन, सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दे उनकी राजनीति के प्रमुख विषय रहे। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और लोकनायक जयप्रकाश नारायण से उनके राजनीतिक संबंधों का भी उल्लेख उनकी जीवन यात्रा के संदर्भ में मिलता है। उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने भी शोक जताया है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी उनके निधन पर संवेदना व्यक्त करते हुए प्रदेश की राजनीति में उनके योगदान को याद किया। रामगोविन्द चौधरी के निधन के साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसे दौर का भी अवसान हुआ, जिसमें छात्र आंदोलन से निकले नेताओं ने दशकों तक विधानसभा और समाजवादी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभायी। बलिया की धरती से निकली उनकी राजनीतिक यात्रा अब स्मृतियों में दर्ज रहेगी।
