मुखर संवाद के लिए शिल्पी यादव की रिपोर्ट
रांची: झारखंड में चिकित्सा सेवा, महिला स्वास्थ्य और बाल नेत्र सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. भारती कश्यप को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। वीमेन ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट्स सोसाइटी ऑफ इंडिया (डब्ल्यूओएस) के उद्घाटन समारोह में उन्हें प्रतिष्ठित ‘स्पेशल लीडरशिप अवॉर्ड’ प्रदान किया गया। वहीं, रांची के विट्रियो-रेटिना सर्जन डॉ. विभूति कश्यप को युवा महिला नेत्र रोग विशेषज्ञों को उत्कृष्ट अकादमिक प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण देने के लिए ‘बेस्ट टीचर’ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। दोनों चिकित्सकों को मिले सम्मान ने झारखंड की चिकित्सा प्रतिभा और जनसेवा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
डॉ. भारती कश्यप को यह सम्मान महिला स्वास्थ्य, बच्चों की दृष्टि सुरक्षा और ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए किए गए उनके कार्यों के मद्देनजर दिया गया। उन्हें यह पुरस्कार ऑल इंडिया ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी (एआईओएस) के अध्यक्ष प्रो. डॉ. जे. एस. तितियाल तथा आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया की उपाध्यक्ष डॉ. नम्रता शर्मा ने प्रदान किया।
छह लाख से अधिक महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग
डॉ. भारती कश्यप के नेतृत्व में आईएमए झारखंड वीमेंस डॉक्टर्स विंग ने महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाने और समय पर बीमारी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अभियान चलाया। अप्रैल 2021 से मई 2026 के बीच झारखंड में छह लाख से अधिक महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग की गई। इस अभियान में पाकुड़, संथाल परगना और कोल्हान के दूरदराज के इलाकों पर विशेष ध्यान दिया गया। आर्थिक रूप से कमजोर और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित महिलाओं तक जांच, चिकित्सकीय परामर्श और उपचार की सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के साथ आईएमए झारखंड वीमेंस डॉक्टर्स विंग की आधिकारिक साझेदारी ने इस अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बीमारी की समय रहते पहचान होने पर उपचार की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को जांच के प्रति जागरूक करना और उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ना इस अभियान का अहम हिस्सा रहा।
25 लाख से अधिक स्कूली बच्चों की आंखों की जांच
बाल नेत्र सुरक्षा के क्षेत्र में भी डॉ. भारती कश्यप की पहल उल्लेखनीय रही है। झारखंड के सरकारी स्कूलों में 25 लाख से अधिक बच्चों की आंखों की जांच की गई। जांच के दौरान दृष्टि दोष से पीड़ित बच्चों को निशुल्क चश्मे उपलब्ध कराए गए। वहीं, मोतियाबिंद से पीड़ित सैकड़ों बच्चों की सर्जरी कर उनकी दृष्टि सुधारने में मदद की गई।बच्चों की आंखों की समय पर जांच का सीधा संबंध उनकी पढ़ाई और भविष्य से है। दृष्टि संबंधी समस्याओं के कारण कई बार बच्चे कक्षा में पढ़ाई ठीक से नहीं कर पाते, लेकिन समय पर पहचान और उपचार से उनकी शैक्षणिक गतिविधियों में सुधार संभव है। इस पहल ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर दृष्टि और शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने में योगदान दिया।
2017 में मिल चुका है नारी शक्ति पुरस्कार
डॉ. भारती कश्यप चिकित्सा सेवा को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के लिए जानी जाती हैं। वर्ष 2017 में उन्हें राष्ट्रपति द्वारा प्रतिष्ठित ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है। अब ‘स्पेशल लीडरशिप अवॉर्ड’ के रूप में मिली नई राष्ट्रीय पहचान उनके चिकित्सा नेतृत्व और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर सक्रियता को रेखांकित करती है।
**डॉ. विभूति कश्यप को मिला बेस्ट टीचर अवॉर्ड**
इसी समारोह में रांची के विट्रियो-रेटिना सर्जन डॉ. विभूति कश्यप को ‘बेस्ट टीचर’ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वीमेन ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट्स सोसाइटी ने उन्हें युवा महिला नेत्र रोग विशेषज्ञों को उत्कृष्ट अकादमिक प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रदान करने के लिए यह सम्मान दिया।
नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में कुशल चिकित्सकों को तैयार करने के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और व्यावहारिक ज्ञान का विशेष महत्व है। डॉ. विभूति कश्यप के शिक्षण योगदान को मिला यह सम्मान चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उनकी भूमिका को मान्यता देता है। दोनों चिकित्सकों को मिले राष्ट्रीय सम्मान चिकित्सा सेवा के अलग-अलग आयामों को सामने लाते हैं। एक ओर महिला स्वास्थ्य और बच्चों की दृष्टि सुरक्षा के लिए व्यापक जनकल्याणकारी अभियान चलाने की उपलब्धि है, तो दूसरी ओर नई पीढ़ी के विशेषज्ञ चिकित्सकों को प्रशिक्षित करने का योगदान। झारखंड के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे राज्य में चिकित्सा सेवा, जनस्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है।
