
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्ट
रांची: कांके रोड स्थित माँ दक्षिणेश्वरी काली मंदिर परिसर में काली पूजा के लिए प्रस्तावित भव्य पंडाल के निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। माँ भवानी क्लब काली पूजा समिति ने आरोप लगाया है कि पूजा पंडाल का निर्माण शुरू करने की तैयारी के दौरान रॉक गार्डन प्रबंधन ने बलपूर्वक काम रोक दिया। समिति के सदस्यों ने इस कार्रवाई पर विरोध जताते हुए धार्मिक आयोजन में बाधा उत्पन्न किए जाने पर नाराजगी जाहिर की है। समिति का कहना है कि जिस स्थान पर पंडाल का निर्माण प्रस्तावित है, वह माँ दक्षिणेश्वरी काली मंदिर परिसर का हिस्सा है और इसके समर्थन में उसके पास आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी माँ भवानी क्लब काली पूजा समिति की ओर से मंदिर परिसर में भव्य काली पूजा आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु माँ काली के दर्शन और पूजन के लिए पहुँचते हैं। पूजा को लेकर समिति की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। इसी बीच पंडाल निर्माण को रोके जाने से आयोजन की तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
निर्माण रोकने को लेकर समिति ने उठाए सवाल
समिति के अनुसार, पूजा पंडाल के निर्माण की तैयारियाँ शुरू होते ही रॉक गार्डन प्रबंधन की ओर से काम रोक दिया गया। समिति ने आरोप लगाया कि जब उसके सदस्यों ने निर्माण कार्य रोके जाने का कारण जानने का प्रयास किया, तो उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। समिति ने इस पूरे घटनाक्रम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि धार्मिक आयोजन की तैयारियों के दौरान इस तरह की स्थिति उत्पन्न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। समिति के अध्यक्ष बलराम सिंह ने बताया कि पंडाल निर्माण के लिए चयनित भूमि मंदिर परिसर का हिस्सा है। उनके अनुसार, समिति के पास इस संबंध में आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं। समिति का पक्ष है कि जब जमीन की स्थिति को लेकर कोई विवाद है, तो उसका समाधान संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में किया जाना चाहिए, ताकि पूजा की तैयारियाँ बाधित न हों। विवाद के बीच स्थानीय प्रशासन की मौजूदगी में अंचल अधिकारी (सीओ), हेहल द्वारा संबंधित भूमि का सीमांकन कराया गया। समिति का दावा है कि सीमांकन के दौरान संबंधित जमीन को मंदिर परिसर का हिस्सा बताया गया। समिति ने इस कार्रवाई को अपने पक्ष के समर्थन में महत्वपूर्ण बताया है। हालाँकि, भूमि के स्वामित्व, सीमाओं और संबंधित पक्षों के दावों को लेकर स्थिति की पूरी आधिकारिक तस्वीर सामने आना अभी बाकी है। सीमांकन के निष्कर्षों और संबंधित दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना जमीन पर अंतिम अधिकार को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। रॉक गार्डन प्रबंधन का पक्ष भी सामने आने पर विवाद के दूसरे पहलू की जानकारी स्पष्ट हो सकेगी। समिति ने कहा कि काली पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की आस्था और परंपरा से जुड़ा वार्षिक आयोजन है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी होती है। ऐसे में विवाद का समय रहते समाधान निकालना जरूरी है, ताकि पूजा की तैयारियाँ निर्धारित समय पर पूरी की जा सकें और श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। समिति ने संबंधित प्रबंधन और प्रशासन से आग्रह किया है कि उपलब्ध दस्तावेजों तथा सीमांकन से जुड़े तथ्यों के आधार पर मामले का उचित समाधान निकाला जाए। साथ ही, पूजा पंडाल का निर्माण शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। समिति का कहना है कि धार्मिक परंपरा के अनुरूप पूजा का आयोजन सुनिश्चित करना सभी संबंधित पक्षों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
माँ भवानी क्लब काली पूजा समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासनिक सीमांकन के बाद भी पंडाल निर्माण का काम रोका जाता है, तो उसके पास आंदोलन का रास्ता अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। समिति के मुताबिक, इस मुद्दे पर स्थानीय लोगों के साथ मिलकर विरोध किया जाएगा और इसके लिए समिति के सदस्य तथा स्थानीय लोग तैयार हैं। फिलहाल, इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की जिम्मेदारी संबंधित पक्षों और प्रशासन पर है। समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर काली पूजा की तैयारियाँ प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि भूमि से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जाँच की जाए, सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिले और प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से विवाद का समाधान निकाला जाए, ताकि धार्मिक आयोजन को लेकर तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो।
