
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
गिरिडीह: गांवा प्रखंड के पटना पंचायत अंतर्गत भेलवा गांव निवासी, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित समाजसेवी एवं पूर्व पंचायत सेवक वासुदेव प्रसाद सिन्हा के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है। उनके श्राद्धकर्म के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उन्हें नम आंखों से याद किया। हर वक्त चेहरे पर सहज मुस्कान और लोगों के प्रति अपनत्व रखने वाले वासुदेव प्रसाद सिन्हा की स्मृतियां श्रद्धांजलि सभा में लोगों की आंखें नम करती रहीं।
विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भेलवा पहुंचकर स्वर्गीय वासुदेव प्रसाद सिन्हा को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सिन्हा ने अपने जीवन को ग्रामीणों की सेवा और उन्हें उनके अधिकारों एवं सरकारी सुविधाओं से जोड़ने के लिए समर्पित किया। उन्होंने ग्रामीण समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने और सरकार की योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाबूलाल मरांडी ने उन्हें ग्रामीणों के बीच शिक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने वाला सशक्त व्यक्तित्व बताया।
पांकी के भाजपा विधायक कुशवाहा शशिभूषण प्रसाद मेहता ने भी वासुदेव प्रसाद सिन्हा को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि उनका व्यक्तित्व और कृतित्व समाज के लिए अनुकरणीय रहा है। अपने कार्यों और व्यवहार से उन्होंने क्षेत्र का नाम रोशन किया। समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और लोगों के साथ उनका आत्मीय संबंध आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान विधायक शशिभूषण मेहता ने वासुदेव प्रसाद सिन्हा की आदमकद प्रतिमा का शिलान्यास भी किया। यह प्रतिमा भेलवा के समीप बगदेडीह में स्थापित की जाएगी। प्रतिमा के माध्यम से उनकी स्मृतियों और समाज के प्रति उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
वासुदेव प्रसाद सिन्हा का जीवन केवल सरकारी सेवा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपने कार्यकाल में ग्रामीणों के बीच शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने का काम किया। विशेष रूप से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ उन्होंने ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान चलाया। लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करते हुए उन्होंने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया। उनके इसी सेवाभाव और उल्लेखनीय कार्यों के लिए भारत सरकार ने उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया था।
श्रद्धांजलि सभा में मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि वासुदेव प्रसाद सिन्हा ने अपने जीवन में जिस तरह लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े होकर सेवा की, वह उन्हें सामान्य व्यक्ति से अलग बनाता है। उनकी कमी को शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। किसी के लिए वह मार्गदर्शक थे, किसी के लिए सहयोगी, तो किसी के लिए परिवार के सदस्य की तरह। उनके निधन से एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और सामाजिक सरोकार से जुड़े एक पूरे अध्याय का अंत हुआ है। हालांकि, उनके कार्य, विचार और लोगों के प्रति उनका अपनत्व उन्हें हमेशा जीवित रखेगा। भेलवा में स्थापित होने वाली उनकी आदमकद प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती रहेगी कि सच्ची सेवा वही है, जिसमें व्यक्ति अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए जीता है।
उनके निधन ने रांची के मोरहाबादी स्थित योग सेंटर से जुड़े लोगों को भी गहरे दुख में डाल दिया है। योग सेंटर के सदस्यों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वासुदेव प्रसाद सिन्हा से जुड़ाव केवल परिचय भर का नहीं था, बल्कि उनके व्यवहार में ऐसा अपनत्व था कि मिलने वाला व्यक्ति उन्हें अपना ही समझने लगता था। उनकी मिलनसारिता, सहजता और आत्मीयता लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बनी रहेगी।
मोरहाबादी योग सेंटर से जुड़े और ‘गुरुजी’ के नाम से प्रसिद्ध गजेन्द्र सिंह, प्रसिद्ध व्यवसायी कमल सिंहानिया, व्यवसायी कमल अग्रवाल, मुकेश कुमार, जीएसटी विभाग के अधिकारी रहे रतन वर्मा, झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता पुनीत कुमार, मुखर संवाद के संपादक अशोक कुमार, वरिष्ठ संवाददाता शिल्पी यादव सहित कई लोगों ने श्राद्धकर्म में शामिल होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
