स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल ,अब दिल के मरीज बच्चों का मुफ्त इलाज, हर चेहरे पर लौटेगी मुस्कान’ ’“पैसों की कमी अब नहीं बनेगी बच्चों की मौत की वजह — झारखंड में शुरू हुई ऐतिहासिक योजना”’

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मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने एक ऐतिहासिक और जनकल्याणकारी पहल की शुरुआत की है। यह योजना उन गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिनके बच्चे दिल के वाल्व या हृदय में छेद जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उनका इलाज संभव नहीं हो पाता था।
स्वास्थ्य मंत्री डा. इरफान अंसारी के संज्ञान में लगातार ऐसे मामले आते रहे, जहां पैसे के अभाव में मासूम बच्चों की जान तक चली जाती थी। एक जनप्रतिनिधि होने के साथ-साथ एक संवेदनशील चिकित्सक के रूप में उन्होंने इस समस्या को गंभीरता से लिया और इसका स्थायी समाधान निकालने का संकल्प लिया। इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है कि आज राज्य में इस महत्वाकांक्षी योजना की सफल शुरुआत हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्री के नेतृत्व में सदर अस्पताल, रांची के ऑडिटोरियम में “ैस्टेट लेवल कांफ्रेंस ऑन केयरींग फॉर चिल्ड्रेन विथ हर्ट डिजीज ” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर विशेष जांच शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें केरल के । केरल के कोच्चि अमृता हॉस्पीटल से आए अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञों द्वारा पूरे झारखंड से आए 170 बच्चों की जांच की गई। जांच के उपरांत 56 बच्चों को सर्जरी हेतु चिन्हित किया गया है। इन सभी बच्चों का ऑपरेशन पूरी तरह से निःशुल्क कराया जाएगा, जिससे उनके परिवारों पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पहले ऐसे बच्चों को इलाज के लिए चेन्नई, चंडीगढ़ या छत्तीसगढ़ भेजना पड़ता था, लेकिन अब राज्य सरकार का प्रयास है कि यह सुविधा झारखंड में ही उपलब्ध हो -वह भी पूरी तरह मुफ्त। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आने वाले दिनों में पूरे राज्य में व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग कैंप लगाए जाएंगे, ताकि सुदूर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों तक पहुंचकर अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को चिन्हित किया जा सके और उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब एक डॉक्टर नीति-निर्माण की भूमिका में होता है, तो उसके निर्णयों का सीधा लाभ समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक पहुंचता है। यह योजना निश्चित रूप से राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी और आने वाले समय में झारखंड को एक सशक्त एवं स्वस्थ भविष्य की ओर अग्रसर करेगी।

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