हुनर को मिला बाजार तो बढ़ा आत्मविश्वास, आदिवासी दिवस पर जीविका दीदियों को मिला सम्मान,चारिटेबल चार्म्स की ओर से रांची के फिरायालाल में स्टॉल उपलब्ध कराया गया

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मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: हाथों में हुनर हो और उसे पहचान दिलाने वाला बाजार मिल जाए, तो आत्मनिर्भरता की राह आसान हो जाती है। झारखंड की ग्रामीण महिलाओं के इसी हुनर और हौसले को मंच देने की पहल आदिवासी दिवस पर रांची में देखने को मिली। चारिटेबल चार्म्स की ओर से झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी (जेएसएलपीएस) के सहयोग से जीविका दीदियों को शहर के प्रतिष्ठित बाजार में अपने उत्पाद बेचने का अवसर दिया गया। रांची के प्रसिद्ध फिरायालाल प्रतिष्ठान में स्टॉल उपलब्ध कराकर इन महिलाओं के उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाने की पहल की गई। वर्ल्ड इंडिजिनस डे के अवसर पर मेन रोड स्थित फिरायालाल बिल्डिंग के बेसमेंट में ख्याति.. द बुटीक में आयोजित समारोह में आदिवासी कला, पारंपरिक हस्तशिल्प और महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। आयोजन का नेतृत्व चारिटेबल चार्म्स की अध्यक्ष डॉ. ख्याति मुंजाल ने किया। इस दौरान जीविका दीदियों के चेहरे पर अपने उत्पादों को बड़े बाजार में प्रदर्शित करने की खुशी और आत्मविश्वास साफ नजर आया।

डॉ. ख्याति मुंजाल ने इस पहल में सहयोग के लिए जेएसएलपीएस के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अनन्य मित्तल के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के पास हुनर की कमी नहीं है, जरूरत है तो केवल उसे सही मंच और बाजार उपलब्ध कराने की। चारिटेबल चार्म्स का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की कला, संस्कृति और परंपराएं हमारी अमूल्य धरोहर हैं। संस्था का प्रयास रहेगा कि महिलाओं के हुनर को उनकी पहचान और आजीविका का मजबूत आधार बनाया जाए। चारिटेबल चार्म्स की जनसंपर्क समिति की अध्यक्ष रूपम झा ने कहा कि आदिवासी संस्कृति और कला को सम्मान के साथ उचित मंच देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से महिलाओं को यह विश्वास मिलता है कि उनकी मेहनत और प्रतिभा की भी बाजार में कीमत है। उन्होंने महिलाओं की आत्मनिर्भरता के लिए भविष्य में भी संस्था की ओर से लगातार काम करने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) वंदना चौधरी तथा जेएसएलपीएस के वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक नितीश कुमार सिन्हा और उनकी टीम की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों ने आदिवासी संस्कृति, स्थानीय हस्तशिल्प, महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। नितीश कुमार सिन्हा ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं और स्थानीय उद्यमियों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। गांवों में तैयार होने वाले उत्पाद जब शहर के बाजार तक पहुंचते हैं, तो महिलाओं को आर्थिक लाभ के साथ अपने काम को आगे बढ़ाने का हौसला भी मिलता है। वहीं विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) वंदना चौधरी ने अनुशासन, आत्मविश्वास, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को समाज के विकास का आधार बताया।

समारोह में आदिवासी कला और हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे लोगों ने खूब सराहा। कार्यक्रम में रीना, निधि गुप्ता, प्रभा सिंह, अर्चना सिंह, प्रतिभा सिंह, किरण सिंह, प्रीति झा, मौमिता चौधरी और आरती सुल्तानिया समेत चारिटेबल चार्म्स के सदस्य, स्वयंसेवक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। समारोह के अंत में अतिथियों का सम्मान किया गया। महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, आदिवासी कला-संस्कृति के संरक्षण और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प लिया गया। चारिटेबल चार्म्स ने भविष्य में भी महिलाओं, बच्चों और समाज के वंचित वर्गों के लिए जनकल्याणकारी कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

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