
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: राजधानी रांची के थड़पखना स्थित शनि मंदिर में शनिवार को शनि महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया गया। महोत्सव को लेकर सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। शहर के विभिन्न इलाकों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान शनिदेव की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। महोत्सव के अवसर पर मंदिर को आकर्षक फूलों, रंग-बिरंगी झालरों और विशेष रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया था। मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्ति गीतों और शनि भजनों की गूंज सुनाई देती रही, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने शनिदेव को तेल, काला तिल, उड़द दाल, फूल और प्रसाद अर्पित कर विधिवत पूजा की। मंदिर के पुजारियों द्वारा विशेष पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महाआरती संपन्न कराई गई। शनिवार होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रही। महिला, पुरुष, बुजुर्ग और युवाओं ने लंबी कतारों में लगकर भगवान शनिदेव के दर्शन किए। कई श्रद्धालुओं ने शनि दोष और ग्रह बाधाओं से मुक्ति के लिए विशेष अनुष्ठान भी कराए। श्रद्धालुओं का मानना था कि शनिदेव की कृपा से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-शांति प्राप्त होती है।
महोत्सव के दौरान मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण भी किया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पेयजल, बैठने और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की गई थी। मंदिर समिति के अध्यक्ष रवीन्द्र वर्मा अपने कमेटी के सदस्यों और स्वयंसेवकों के साथ पूरे आयोजन के दौरान व्यवस्था संभालते नजर आए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से भी आवश्यक इंतजाम किए गए थे।
मनोकामना शनि मंदिर समिति के अध्यक्ष्ज्ञ रवीन्द्र वर्मा ने बताया कि हर वर्ष शनि महोत्सव बड़े ही श्रद्धा और भव्यता के साथ आयोजित किया जाता है। इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को यादगार बना दिया। उन्होंने कहा कि शनि महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि लोगों की आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। देर शाम आयोजित भव्य महाआरती और भजन संध्या के साथ शनि महोत्सव का समापन हुआ। आरती के समय पूरा मंदिर परिसर जय शनिदेव के जयकारों से गूंज उठा। महोत्सव में शामिल श्रद्धालुओं ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का अद्भुत संगम बताया।
