
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: सरला बिरला विश्वविद्यालय (एसबीयू), रांची और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के संयुक्त तत्वावधान में महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना सुरक्षा (सीआईआईपी) विषय पर पांच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में शुरू हुआ। 10 से 14 अगस्त तक चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य सीआईएसएफ कर्मियों को साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना, उभरते साइबर खतरों और तकनीक आधारित सुरक्षा तंत्र की जानकारी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है। कार्यक्रम की शुरुआत सरला बिरला विश्वविद्यालय और सीआईएसएफ के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के साथ हुई। इस समझौते के माध्यम से साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण अवसंरचना संरक्षण के क्षेत्र में दोनों संस्थानों के बीच ज्ञान एवं विशेषज्ञता के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, तेजी से बदलते डिजिटल परिवेश में महत्वपूर्ण संस्थानों और प्रणालियों की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। एमओयू हस्ताक्षर समारोह में सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सी. जगनाथन, महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक, रजिस्ट्रार प्रो. एस.बी. डांडिन, विभिन्न संकायों के डीन और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। वहीं सीआईएसएफ की ओर से महानिरीक्षक प्रबोध चंद्र, कमांडेंट औशुतोष चौधरी और असिस्टेंट कमांडेंट चेकी शेरपा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
इसके बाद विश्वविद्यालय की एआई/एमएल लैब में प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र आयोजित किया गया। फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड एप्लाइड साइंसेज के डीन डॉ. पंकज के. गोस्वामी ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने साइबर क्षेत्र में लगातार बढ़ रही चुनौतियों और महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों की समझ विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
कुलपति प्रो. सी. जगनाथन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल) और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी उभरती तकनीकों को समझना वर्तमान समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण अवसंरचना पर होने वाले साइबर हमलों का प्रभाव व्यापक हो सकता है। ऐसे में साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक पहलुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
विश्वविद्यालय के महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक ने सीआईएसएफ के प्रतिभागियों से प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने और विशेषज्ञों के साथ सक्रिय संवाद करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार नए खतरे सामने आ रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों के कर्मियों का तकनीकी रूप से सक्षम और अपडेट रहना आवश्यक है।
सीआईएसएफ के महानिरीक्षक प्रबोध चंद्र ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन के लिए सरला बिरला विश्वविद्यालय की सराहना की। उन्होंने प्रतिभागियों से सभी प्रशिक्षण सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लेने और विशेषज्ञों से अधिक से अधिक जानकारी हासिल करने का आह्वान किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप कुमार सिंह मोदक ने प्रस्तुत की। उन्होंने प्रशिक्षण के विभिन्न सत्रों और विषयों की जानकारी दी। धन्यवाद ज्ञापन कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव ने किया।
एसबीयू के प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान और राज्यसभा सांसद सह निदेशक, प्लानिंग एंड डेवलपमेंट डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने विश्वविद्यालय और सीआईएसएफ के बीच हुए एमओयू पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह समझौता साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण अवसंरचना संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण को नई दिशा देगा।
