एनडीए के सभी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन कर रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में आवाज बुलंद की

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मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांचीः झारखंड में राज्यस्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित तौर पर नौकरी बेचे जाने के आरोप और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। छात्रों के आंदोलन के समर्थन में अब भाजपा ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। बुधवार को झारखंड से एनडीए के सांसदों ने संसद परिसर में बैनर लेकर प्रदर्शन किया। सांसदों ने रांची में आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा कथित रूप से बर्बर कार्रवाई किए जाने का आरोप लगाया और इसके लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया। इससे एक दिन पहले मंगलवार को भी एनडीए के सभी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन कर रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में आवाज बुलंद की थी। भाजपा अब इस मुद्दे को विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर छात्रों में व्याप्त असंतोष को राष्ट्रीय मंच पर उठाया जाएगा। भाजपा नेताओं का आरोप है कि रांची में विधानसभा का घेराव करने जा रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस ने बल प्रयोग किया। पार्टी का दावा है कि आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ कथित मारपीट और पुलिस कार्रवाई के पीछे राजनीतिक दबाव था। झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि छात्रों पर पुलिस का हमला कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इशारे पर हुआ। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया सामने आने पर ही इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की तस्वीर और स्पष्ट होगी। भाजपा की रणनीति ऐसे समय में सामने आई है, जब नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के मुद्दे पर कांग्रेस केंद्र सरकार को लगातार घेर रही है। भाजपा नेताओं का मानना है कि झारखंड के छात्र आंदोलन को राष्ट्रीय मुद्दा बनाकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर पलटवार किया जा सकता है। पार्टी झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को एक साथ जोड़कर देशभर में कांग्रेस के खिलाफ अभियान चलाने की तैयारी में है। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने इस अभियान के लिए व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत संसद का सत्र समाप्त होने के बाद झारखंड भाजपा के नेताओं को दूसरे राज्यों में भेजे जाने की तैयारी है। पार्टी नेता दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरू समेत देश के प्रमुख शहरों में जाकर झारखंड के छात्र आंदोलन का मुद्दा उठाएंगे। इन कार्यक्रमों में छात्रों की मांगों, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाने की तैयारी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, दूसरे राज्यों में होने वाले कार्यक्रमों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश होगी कि झारखंड में छात्रों के साथ कथित अन्याय के खिलाफ भाजपा उनके साथ खड़ी है। इसके साथ ही कांग्रेस और राहुल गांधी पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी अपनाई जाएगी।
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर छात्रों का आक्रोश पहले से जारी है। आंदोलनकारी छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं। अब इस आंदोलन के राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करने से झारखंड का छात्र मुद्दा आने वाले दिनों में भाजपा और कांग्रेस के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का विषय बन सकता है।

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