सीजीएल को रद्द करने के बाद सचिवालय में काम कर रहे कर्मचारियों का गुस्सा भड़का कर्मचारियों को सचिवालय में प्रवेश करने से रोका गया

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मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के माध्यम से चयनित होकर नियुक्त हुए बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने मंगलवार को रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन किया। राज्य सरकार द्वारा सीजीएल परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले से नाराज अभ्यर्थियों ने कहा कि इस निर्णय ने उनके रोजगार और भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना था कि वे कल तक सचिवालय और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में कर्मचारी के रूप में काम कर रहे थे, लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद उन्हें फिर से बेरोजगारी की स्थिति में धकेल दिया गया है। अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने जेएसएससी सीजीएल की चयन प्रक्रिया में शामिल होकर परीक्षा पास की थी। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनका चयन हुआ और उन्हें नियुक्ति भी दी गई। कई अभ्यर्थी नियुक्ति के बाद अपने-अपने पदों पर काम कर रहे थे। अब परीक्षा रद्द किए जाने के निर्णय से उनके सामने नौकरी बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार ने परीक्षा रद्द करने से पहले उनका पक्ष नहीं सुना। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्ति मिलने के बाद वे अपने पद पर जिम्मेदारी निभा रहे थे। ऐसे में यदि परीक्षा को लेकर किसी स्तर पर गड़बड़ी की शिकायत सामने आई है तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए थी। दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा को रद्द कर सभी सफल अभ्यर्थियों को एक ही नजर से देखना उचित नहीं है।

अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने इस नौकरी के लिए काफी मेहनत की थी। कई ऐसे अभ्यर्थी भी हैं, जिन्होंने केंद्र सरकार या अन्य विभागों में उपलब्ध नौकरी के विकल्प छोड़कर झारखंड में काम करने का फैसला लिया था। नियुक्ति के बाद उन्होंने अपने भविष्य की योजनाएं इसी नौकरी के आधार पर बनाई थीं। अब परीक्षा रद्द होने से उनके सामने आर्थिक और पारिवारिक परेशानियां भी खड़ी हो गई हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। वहीं, जिन अभ्यर्थियों ने बिना किसी गलती के चयन प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति हासिल की है, उनके हितों की रक्षा की जाए। अभ्यर्थियों का कहना था कि सरकार को उनका पक्ष सुनने के लिए संवाद की पहल करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए और नियुक्तियों पर पुनर्विचार किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसी परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगने पर दोषियों की पहचान करना जरूरी है, लेकिन उसका खामियाजा उन अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया में मेहनत कर सफलता हासिल की है। प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने सरकार से अपने भविष्य को लेकर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की। उनका कहना था कि वे न्याय चाहते हैं और सरकार से उम्मीद है कि उनके पक्ष को भी गंभीरता से सुना जाएगा। अभ्यर्थियों ने कहा कि वे अपनी नियुक्ति और रोजगार की सुरक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

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