नवाचार और गुणवत्ता से एमएसएमई को प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर,विक्रेता विकास कार्यक्रम सह उत्पाद प्रदर्शनी-2026 का शुभारंभ, 200 से अधिक उद्यमी हुए शामिल

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मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बाजार की प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करने और सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की खरीद प्रक्रिया से जोड़ने के उद्देश्य से बुधवार को विक्रेता विकास कार्यक्रम सह उत्पाद प्रदर्शनी-2026 का शुभारंभ हुआ। एमएसएमई-विकास कार्यालय, एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार, रांची और सीएमपीडीआई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन रवीन्द्र भवन, सीएमपीडीआई में किया जा रहा है। कार्यक्रम में 200 से अधिक एमएसएमई उद्यमियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन सीसीएल के सीएमडी नीलेन्दु कुमार सिंह, सीएमपीडीआई के सीएमडी चौधरी शिवराज सिंह, एमएसएमई-विकास कार्यालय के निदेशक इंद्रजीत यादव, सीसीएल एवं सीएमपीडीआई के मुख्य सतर्कता अधिकारी पंकज कुमार सिंह, सीएमपीडीआई के निदेशक (टी/सीआरडी) नृपेन्द्र नाथ, निदेशक (टी/पी-डी) अजय कुमार और निदेशक (टी/आरडी-टी) आनंद मोहन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। सहायक निदेशक गौरव ने अतिथियों और उद्यमियों का स्वागत किया।
एमएसएमई-विकास कार्यालय के निदेशक इंद्रजीत यादव ने कार्यक्रम के उद्देश्य की जानकारी देते हुए कहा कि इससे सूक्ष्म और लघु उद्यमियों को विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के अधिकारियों से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। उद्यमी संबंधित संस्थानों में वेंडर पंजीकरण की प्रक्रिया, खरीद व्यवस्था और अपने उत्पादों की आपूर्ति से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकेंगे। कार्यक्रम में जेम (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) की ओर से भी प्रस्तुति दी जा रही है। साथ ही क्रेता-विक्रेता संवाद आयोजित कर उद्यमियों की शंकाओं का समाधान किया जा रहा है। मुख्य सतर्कता अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि विजिलेंस अवेयरनेस कैंपेन-2026 के तहत आयोजित यह कार्यक्रम सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे उद्यमियों को खरीद प्रक्रिया को समझने के साथ ही सरकारी संस्थानों के साथ कारोबार के अवसर मिलेंगे।

सीएमपीडीआई के निदेशक नृपेन्द्र नाथ ने कहा कि एमएसएमई देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। रांची क्षेत्र की एमएसएमई इकाइयों को ऐसे उत्पाद विकसित करने की जरूरत है, जिनकी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में मांग हो। स्थानीय स्तर पर उत्पादों की उपलब्धता से संस्थानों की सामग्री आपूर्ति लागत में कमी आएगी और स्थानीय उद्यमों को भी बाजार मिलेगा। उन्होंने खरीद विभाग की प्रक्रिया की जानकारी तकनीकी सत्र में देने की बात कही।
सीएमपीडीआई के सीएमडी चौधरी शिवराज सिंह ने कहा कि विक्रेता विकास कार्यक्रम और उत्पाद प्रदर्शनी से नए एमएसएमई एवं स्टार्टअप उद्यमियों को काफी लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि सफल उद्योग रातों-रात नहीं बनता। उत्पाद की गुणवत्ता, आफ्टर-सेल सर्विस और ग्राहकों के फीडबैक के आधार पर लगातार सुधार सफलता के लिए जरूरी है। उन्होंने उद्यमियों से नवाचार और नए अवसरों को तलाशने के साथ गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मक लागत, विश्वास कायम करने और बेहतर सेवा पर ध्यान देने की अपील की। मुख्य अतिथि सीसीएल के सीएमडी नीलेन्दु कुमार सिंह ने कहा कि छोटी-छोटी इकाइयां ही आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने एमएसएमई उद्यमियों से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भागीदार बनने की अपील की और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि समय की मांग के अनुरूप उत्पाद और उद्यम में बदलाव जरूरी है।

तकनीकी सत्र में सीसीएल, सीएमपीडीआई, बीएसएल/सेल बोकारो, हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड, दक्षिण-पूर्व रेलवे, गेल और एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड के वरीय अधिकारियों ने अपनी खरीद प्रक्रिया और वेंडर रजिस्ट्रेशन की जानकारी दी। जेम के प्रशिक्षक सुबोधकांत ने पंजीकरण प्रक्रिया समझाई। वहीं आरएक्सआईएल की प्रबंधक उपासना मजूमदार ने ट्रेड्स से संबंधित जानकारी दी।
कार्यक्रम के दूसरे दिन मेकॉन, यूसीआईएल, सिडबी, एनएसएसएच/एनएसआईसी समेत अन्य संस्थानों के अधिकारी खरीद प्रक्रिया और एमएसएमई के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी देंगे। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से भी उद्यमियों को अवगत कराया जाएगा। प्रदर्शनी में पांच सार्वजनिक एवं सरकारी उपक्रमों तथा 15 सूक्ष्म एवं लघु उद्यम इकाइयों ने स्टॉल लगाए हैं। प्रश्नोत्तर सत्र में उद्यमियों ने अधिकारियों से सीधे संवाद कर अपनी शंकाओं का समाधान किया।

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