भीख मांगनेवालों का जीवन संवारने का काम करेगी स्वालंबन, केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्माईल का रांची में शुभांरभ

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मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांचीरू सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार के सौजन्य से स्माइल बेगरी आश्रय गृह रांची झारखंड का उदघाटन आज बुधवार को रांची के चिरौन्दी मे बतौर मुख्य अतिथि महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग झारखंड सरकार के विशेष सचिव अभय कुमार अम्बष्ट जी के द्वारा फिता काटकर और दीप प्रज्वलित कर किया गया।
केन्द्र सरकार की स्माइल योजना का मुख्य उद्देश्य है कि भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों को कानूनी सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा, शिक्षा, कौशल विकास और आर्थिक अवसर प्रदान करके उनका पुनर्वास करना। इसका लक्ष्य इन हाशिए पर पड़े वर्गों को समाज की मुख्यधारा में लाना और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए सशक्त बनाना है।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “स्माईल” के तहत अब रांची में भीख मांगने वाले लोगों के पुनर्वास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ी पहल शुरू की गई है। सामाजिक संस्था “स्वालंबन” के माध्यम से इस योजना का शुभारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य सड़कों, चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर भीख मांगकर जीवन यापन करने वाले जरूरतमंद लोगों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत भीख मांगने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें आश्रय, भोजन, स्वास्थ्य सुविधा, परामर्श, शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ने का काम किया जाएगा। साथ ही उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाना भी इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।
आश्रय गृह संचालन का उदेश्य है कि सामाज मे हाशिए पर रहने वाले उपेक्षित व्यक्ति के समूह के लोग होते हैं जिन्हें सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक भेदभाव के कारण समाज के बाहरी छोर पर धकेल दिया जाता है और वे मूलभूत अधिकारों तथा संसाधनों से वंचित रह जाते हैं।

आश्रय गृह उदघाटन के अवसर पर मुख्य रूप से विशेष सचिव अभय कुमार अम्बष्ट ने स्माइल बेगरी आश्रय गृह के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि झारखंड मे स्माइल का यह पहला प्रोजेक्ट हैं, प्रोजेक्ट तो यह केंद्र सरकार का है लेकिन मोनिटरिंग राज्य सरकार करेगा। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी संवेदनशील हैं।रांची में शुरू हुए इस अभियान के तहत स्वालंबन संस्था पहले चरण में शहर के प्रमुख इलाकों में सर्वे करेगी। इसके बाद जरूरतमंद लोगों को अस्थायी आश्रय गृहों में रखा जाएगा और उनकी काउंसलिंग की जाएगी। संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि कई लोग मजबूरी, गरीबी और परिवार से बिछड़ने के कारण भीख मांगने को विवश होते हैं। ऐसे लोगों को फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटाना ही इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।

स्वालंबन की सचिव पुनीता राय ने कहा कि समाज और प्रशासन के सहयोग से ही इस तरह की योजनाएं सफल हो सकती हैं। लोगों से अपील की गई कि वे भीख देने के बजाय ऐसे पुनर्वास अभियानों को समर्थन दें, ताकि जरूरतमंद लोगों को स्थायी जीवनयापन का अवसर मिल सके। उदघाटन के अवसर पर मुख्य रूप से विशेष सचिव अभय कुमार अम्बष्ट, सामाजिक सुरक्षा विभाग रविशंकर मिश्रा, बाल संरक्षक आयोग के सचिव वेद प्रकाश तिवारी, स्वतंत्र निदेशक बेदांता, संस्था के सचिव पुनिता राय, सामाजिक कार्यकर्ता नरेश ठाकुर, डालसा स्नेह लता दुबे, वृद्धा आश्रय बरियातु रूबी देवी, कौन्सलर सुषमा सिन्हा उपस्थित थे।

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