
मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में सरला बिरला विश्वविद्यालय (एसबीयू) ने सोमवार को अपने अंगीकृत गांव आरा से 17 दिवसीय हरित ग्राम अभियान का शुभारंभ किया। विश्वविद्यालय के उन्नत भारत अभियान (यूबीए) प्रकोष्ठ और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई के संयुक्त तत्वावधान में शुरू हुआ यह अभियान 4 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान विश्वविद्यालय के अंगीकृत गांवों और आसपास के क्षेत्रों में लगभग पांच हजार पौधे लगाए जाएंगे तथा पर्यावरण संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। अभियान के तहत विश्वविद्यालय द्वारा अंगीकृत गांव आरा, बड़ाम, सिलवई, महिलोंग और हरातू सहित आरा गेट से महिलोंग तक सड़क किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीणों, विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों को पौधों के संरक्षण, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों तथा पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा। विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित कर क्षेत्र को स्थायी रूप से हरित बनाना है। अभियान का शुभारंभ विश्वविद्यालय के महानिदेशक ’’प्रो. गोपाल पाठक’’ ने पौधारोपण कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने की अपील की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति ’’प्रो. सी. जगनाथन’’ ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक दायित्व भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल पौधारोपण तक सीमित न रहें, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि सतत विकास के लक्ष्य तभी पूरे होंगे, जब समाज का प्रत्येक नागरिक प्रकृति के संरक्षण के लिए आगे आएगा।
उन्नत भारत अभियान के समन्वयक ’’डॉ. मुकेश कुमार सिंह’’ ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण तभी संभव है, जब समाज का हर वर्ग अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सक्रिय भागीदारी निभाए। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों के निर्वहन को भी समान महत्व देता है और इसी सोच के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में यह अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के शुभारंभ अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, ग्राम प्रतिनिधि और स्थानीय ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक पौधारोपण किया तथा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान लोगों को वृक्षों के महत्व, जैव विविधता के संरक्षण और स्वच्छ पर्यावरण के प्रति जागरूक भी किया गया। इस अवसर पर सरला बिरला विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान तथा राज्यसभा सांसद एवं विश्वविद्यालय के निदेशक (प्लानिंग एंड डेवलपमेंट) ’’डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा’’ ने सामुदायिक सहभागिता पर आधारित इस पहल की सराहना करते हुए आयोजकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय का यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण समाज में हरित चेतना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
