


मुखर संवाद के लिये शिल्पी यादव की रिपोर्टः-
रांची: राजधानी रांची के वर्द्धमान कंपाउंड में हरिमति दुर्गा पूजा समिति पिछले 91 वर्षों से बंगाली परंपरा के अनुसार दुर्गा पूजा का आयोजन करती आ रही है। नौ दशक से अधिक पुरानी यह पूजा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि रांची में रहने वाले बंगाली समुदाय की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को भी जीवंत बनाए हुए है। हर वर्ष दुर्गाेत्सव के अवसर पर यहां मां दुर्गा की आराधना करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। वर्द्धमान कंपाउंड के स्थानीय बंगाली परिवारों के साथ-साथ राजधानी के विभिन्न इलाकों में रहने वाले बंगाली समुदाय के लोग भी इस पूजा में शामिल होते हैं। समिति की यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही है। वर्षों से आयोजित हो रहे इस दुर्गाेत्सव के माध्यम से बंगाली समाज अपनी धार्मिक मान्यताओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का प्रयास कर रहा है। मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति का भाव इस आयोजन के केंद्र में रहता है। पूजा के दौरान बंगाली परंपरा के अनुसार मां दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होने वाली आराधना श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है।
अप्रवासी बंगाली भी पहुंचते हैं मां के दरबार में
हरिमति दुर्गा पूजा समिति के दुर्गाेत्सव की खास बात यह है कि इससे केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि रांची से बाहर रहने वाले बंगाली समुदाय के लोग भी भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। दुर्गा पूजा के अवसर पर दूसरे स्थानों पर रहने वाले अप्रवासी बंगाली परिवार भी मां के दर्शन और आराधना के लिए यहां पहुंचते हैं। अपने परिवार, समाज और परंपराओं से जुड़ने का यह अवसर उनके लिए विशेष महत्व रखता है। दुर्गाेत्सव के दौरान वर्द्धमान कंपाउंड में बंगाली समुदाय के लोगों का एक साथ जुटना सामाजिक मेल-मिलाप को भी मजबूत करता है। पूजा के माध्यम से पुरानी पीढ़ी अपनी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाती है। वहीं, युवा पीढ़ी भी अपने सांस्कृतिक मूल्यों और धार्मिक विरासत से परिचित होती है। इस तरह हरिमति दुर्गा पूजा समिति का आयोजन धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि समुदाय को एक सूत्र में बांधने का माध्यम भी है।
तीन दिनों तक खिचड़ी महाभोग का वितरण
हरिमति दुर्गा पूजा समिति की एक अन्य प्रमुख विशेषता तीन दिनों तक श्रद्धालुओं के बीच खिचड़ी महाभोग का वितरण है। मां दुर्गा की आराधना के साथ महाभोग वितरण की यह परंपरा आयोजन को और खास बनाती है। श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद महाभोग ग्रहण करते हैं। इस दौरान सामूहिक सहभागिता और सेवा भाव का वातावरण बना रहता है। धार्मिक आयोजनों में प्रसाद वितरण का विशेष महत्व होता है। खिचड़ी महाभोग के माध्यम से श्रद्धालु मां का प्रसाद ग्रहण करते हैं और पूजा के इस सामूहिक उत्सव का हिस्सा बनते हैं। तीन दिनों तक चलने वाली यह व्यवस्था समिति की परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। इससे पूजा में शामिल होने वाले लोगों के बीच आपसी जुड़ाव और सामुदायिक भावना भी मजबूत होती है।
सांस्कृतिक विरासत को सहेज रहा है दुर्गाेत्सव
रांची में बंगाली समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में दुर्गा पूजा का विशेष स्थान है। ऐसे में हरिमति मंदिर दुर्गा पूजा समिति की 91 वर्षों की यात्रा अपने आप में महत्वपूर्ण है। बदलते समय के साथ सामाजिक जीवन और रहन-सहन में कई बदलाव आए हैं, लेकिन समिति की ओर से बंगाली परंपरा के अनुसार मां दुर्गा की पूजा-अर्चना जारी रखना सांस्कृतिक निरंतरता का उदाहरण है। वर्द्धमान कंपाउंड में आयोजित यह दुर्गाेत्सव स्थानीय बंगाली परिवारों के साथ-साथ रांची के अन्य क्षेत्रों में रहने वाले श्रद्धालुओं को भी एक मंच प्रदान करता है। बाहर रहने वाले अप्रवासी बंगालियों की सहभागिता इस पूजा के व्यापक सामाजिक जुड़ाव को दर्शाती है। हरिमति मंदिर दुर्गा पूजा समिति का यह आयोजन आस्था, परंपरा, सेवा और सामाजिक एकता का संगम है। 91 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा रांची में बंगाली संस्कृति की पहचान को मजबूत करने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी विरासत से जुड़े रहने का अवसर भी प्रदान कर रही है। मां दुर्गा की आराधना और खिचड़ी महाभोग वितरण के माध्यम से यह दुर्गाेत्सव हर वर्ष श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और सामूहिकता का भाव जागृत करता है।
