इंजीनियरिंग की नींव मजबूत होगी, तभी तकनीक का सही उपयोग संभव, एआई के दौर में मूल सिद्धांतों, तार्किक सोच और व्यावहारिक समाधान पर डॉ. उदय बी. सिंह ने दिया जोर

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मुखर संवाद के लिए शिल्पी यादव की रिपोर्ट

रांची : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच इंजीनियरिंग विद्यार्थियों के लिए तकनीक के साथ-साथ विषय के मूल सिद्धांतों की मजबूत समझ बेहद जरूरी है। केवल नई तकनीकों के पीछे दौड़ने के बजाय इंजीनियरिंग की बुनियादी अवधारणाओं, तार्किक सोच और वास्तविक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान की क्षमता विकसित करना ही विद्यार्थियों को भविष्य के लिए सक्षम बनाएगा। यह बातें यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के बायो-प्रोडक्ट्स एंड बायोसिस्टम्स इंजीनियरिंग विभाग के प्राध्यापक डॉ.उदय बी.सिंह ने सरला बिरला विश्वविद्यालय में आयोजित एक्सपर्ट टॉक के दौरान कहीं।

सरला बिरला विश्वविद्यालय और यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के बीच हुए शैक्षणिक करार के तहत आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में डॉ. सिंह ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के साथ इंजीनियरिंग के मूल सिद्धांतों तथा उनके व्यावहारिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बदलती तकनीकी दुनिया में इंजीनियरिंग शिक्षा की भूमिका और विद्यार्थियों के सामने मौजूद अवसरों पर भी अपने विचार साझा किए।
डॉ. सिंह ने कहा कि एआई आज तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसका प्रभाव लगभग हर क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। ऐसे दौर में विद्यार्थियों के लिए यह समझना जरूरी है कि तकनीक साधन है, जबकि समस्या की सही पहचान, उसके पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांत और समाधान विकसित करने की क्षमता इंजीनियरिंग की वास्तविक ताकत है। उन्होंने कहा कि मजबूत बुनियादी ज्ञान के बिना अत्याधुनिक तकनीक का प्रभावी और जिम्मेदार इस्तेमाल संभव नहीं है।

उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे एआई समेत नई तकनीकों को सीखने के साथ अपने मूल विषयों पर भी समान रूप से ध्यान दें। गणित, विज्ञान, इंजीनियरिंग के मूल सिद्धांतों और विश्लेषणात्मक क्षमता को मजबूत करना उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक बेहतर इंजीनियर वही है, जो केवल उपलब्ध तकनीक का इस्तेमाल न करे, बल्कि समाज और वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझकर उनके उपयोगी, टिकाऊ और व्यावहारिक समाधान विकसित कर सके। कार्यक्रम में सरला बिरला विश्वविद्यालय के महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक, कुलपति प्रो. सी. जगनाथन, कुलसचिव प्रो. एस. बी. दंडिन समेत विभिन्न संकायों के डीन, एसोसिएट डीन और विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे। विशेषज्ञ के साथ विद्यार्थियों और शिक्षकों का संवाद कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
इस अवसर पर सरला बिरला विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान तथा राज्यसभा सांसद सह निदेशक, प्लानिंग एंड डेवलपमेंट डॉ.प्रदीप कुमार वर्मा ने एक्सपर्ट टॉक के आयोजन के लिए आयोजक मंडली को शुभकामना संदेश प्रेषित किया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि तकनीक की रफ्तार चाहे कितनी भी तेज क्यों न हो, इंजीनियरिंग की असली ताकत उसकी मजबूत बुनियाद, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और समाज की समस्याओं को समाधान में बदलने की क्षमता में निहित है।

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