
’’मुखर संवाद के लिए शिल्पी यादव की रिपोर्ट’’
रांची: सरला बिरला विश्वविद्यालय में शिक्षकों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं मशीन लर्निंग विषय पर पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (एफडीपी) का शुभारंभ हुआ। झारखंड राज्य संकाय विकास अकादमी (जेएसएफडीए) एवं उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में सरला बिरला विश्वविद्यालय नॉलेज पार्टनर के रूप में भाग ले रहा है। कार्यक्रम 9 अक्टूबर तक चलेगा। इसका उद्देश्य शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग की नवीनतम तकनीकों एवं उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों से परिचित कराना है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. एला कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता वर्तमान समय की महत्वपूर्ण तकनीक बन चुकी है और इसके साथ अनेक अवसरों के साथ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि मशीन लर्निंग में गुणवत्तापूर्ण, विश्वसनीय और संतुलित आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका है। गलत, अधूरे अथवा पक्षपातपूर्ण आंकड़ों के आधार पर तैयार किए गए मॉडल गलत परिणाम दे सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों से एआई के जिम्मेदार उपयोग के साथ विद्यार्थियों में तार्किक, रचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक सोच विकसित करने का आह्वान किया।
प्रो. एला कुमार ने शिक्षा, इंटरनेट से जुड़े उपकरणों और स्मार्ट तकनीकों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने जेएसएफडीए की पहल तथा एआई कार्यबल के गठन की सराहना करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा में तकनीकी बदलाव के अनुरूप शिक्षकों का निरंतर क्षमता विकास आवश्यक है।
सरला बिरला विश्वविद्यालय के महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग का प्रभाव शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने एआई आधारित प्रणालियों के प्रभावी उपयोग के लिए विश्वसनीय एवं सटीक आंकड़ों की आवश्यकता पर बल दिया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सी. जगनाथन ने कहा कि शिक्षकों का उभरती हुई कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीकों से परिचित होना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय में शैक्षणिक एवं तकनीकी विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों तथा ड्रोन और रोबोटिक्स जैसी आधुनिक प्रयोगशालाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के साथ शिक्षण की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाने में सहायक होंगे।
कुलसचिव प्रो. एस. बी. दंडीन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संगणकीय बुद्धिमत्ता शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों को इन तकनीकों के प्रभावी एवं जिम्मेदार उपयोग के लिए तैयार करना आवश्यक है।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. विश्वजीत करण ने बताया कि पांच दिवसीय एफडीपी के दौरान शिक्षकों को एआई एवं मशीन लर्निंग के व्यावहारिक अनुप्रयोगों की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम में चौटजीपीटी, बड़े भाषा मॉडल, जनरेटिव एआई, एजेंटिक एआई, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, गहन अधिगम, कंप्यूटर विजन और रोबोटिक्स सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। तकनीकी सत्र में प्रो. सी. जगनाथन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मूल अवधारणाओं एवं इसके विभिन्न अनुप्रयोगों पर चर्चा की। वहीं प्रो. सुभाष चंद्र यादव ने ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित युग में शिक्षा का पुनर्परिभाषण’ विषय पर व्याख्यान देते हुए डिजिटल शिक्षण पद्धति, जनरेटिव एआई, चौटजीपीटी और अन्य आधुनिक तकनीकों के शिक्षा में प्रभावी उपयोग पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर श्री विशाल कुमार एवं श्रीमती बरूणा दत्ता ने संस्था के विजन एवं मिशन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षकों के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास को सशक्त बनाना संस्था की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में एआई एवं एमएल की भूमिका लगातार बढ़ रही है, इसलिए शिक्षकों के लिए इन तकनीकों की व्यावहारिक समझ विकसित करना जरूरी है।
सरला बिरला विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान तथा राज्यसभा सांसद सह निदेशक, प्लानिंग एंड डेवलपमेंट, डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने भी एफडीपी के सफल आयोजन के लिए शुभकामना संदेश प्रेषित किया। उन्होंने कहा कि एआई एवं मशीन लर्निंग जैसी उभरती तकनीकों में शिक्षकों की दक्षता बढ़ाना उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में डॉ. पंकज के. गोस्वामी, डीन, फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड एप्लाइड साइंसेज, डॉ. संतोष कुमार दास, आनंद कुमार विश्वकर्मा, अमृत कुमार, सुप्रिया सोनी, कुणाल राज, अमन जसबीर चंद्र, बसंत कुमार सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।
